इंदौर, 08 सितम्बर।
भोपाल में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग कर रहे इंटर्न डॉक्टरों पर वाटर कैनन और लाठीचार्ज की कार्रवाई के विरोध में मंगलवार को इंदौर के एमवाय अस्पताल में जूनियर और इंटर्न डॉक्टरों ने प्रदर्शन किया। डॉक्टरों ने सुबह 9 से 11 बजे तक ओपीडी में मरीजों को देखा, इसके बाद सेवाओं का बहिष्कार कर विरोध जताया। इससे अस्पताल की नियमित ओपीडी व्यवस्था प्रभावित हुई।
एमजीएम मेडिकल कॉलेज जूनियर डॉक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष विक्रम सिंह सिद्धू ने कहा कि इंटर्न डॉक्टर लंबे समय से स्टाइपेंड में वृद्धि की मांग कर रहे हैं। उनके अनुसार भोपाल में डॉक्टर शांतिपूर्ण ढंग से अपनी मांग रख रहे थे, लेकिन प्रदर्शन के दौरान वाटर कैनन और लाठीचार्ज की कार्रवाई की गई। इसी के विरोध में इंदौर के डॉक्टर प्रदर्शन कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को सामने रखने वाले डॉक्टरों के खिलाफ ऐसी कार्रवाई उचित नहीं है। प्रदर्शनकारी डॉक्टरों ने सरकार से इंटर्न डॉक्टरों का स्टाइपेंड बढ़ाने और भोपाल में हुई पुलिस कार्रवाई की जांच कराने की मांग की है। साथ ही जिम्मेदार पुलिसकर्मियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी उठाई गई है।
इंटर्न डॉक्टर रिंकू वर्मा ने बताया कि वर्तमान में उन्हें प्रतिमाह 14,337 रुपये स्टाइपेंड मिलता है। उनका कहना है कि अन्य राज्यों की तुलना में यह राशि काफी कम है। उन्होंने दावा किया कि कई राज्यों में मेडिकल शिक्षा की फीस कम होने के बावजूद वहां इंटर्न डॉक्टरों को इससे अधिक स्टाइपेंड दिया जा रहा है।
रिंकू वर्मा ने आरोप लगाया कि भोपाल में प्रदर्शन के दौरान इंटर्न डॉक्टरों के साथ कठोर व्यवहार किया गया। उनके अनुसार प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए वाटर कैनन, लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल हुआ, जिसमें कई डॉक्टर घायल हुए। उन्होंने कहा कि अस्पतालों में नियमित ड्यूटी कर मरीजों की सेवा करने वाले डॉक्टरों के शांतिपूर्ण प्रदर्शन पर ऐसी कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।
डॉक्टरों ने सरकार से जल्द स्टाइपेंड बढ़ाने और भोपाल की घटना के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई करने की मांग दोहराई है। प्रदर्शनकारियों ने स्पष्ट किया कि मांगों पर निर्णय नहीं होने की स्थिति में आंदोलन आगे भी जारी रखा जाएगा।















