नई दिल्ली, 8 सितंबर।
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन की तस्वीर धीरे-धीरे साफ होती नजर आ रही है। दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच सीटों की संख्या को लेकर सहमति बनने के संकेत मिले हैं। अब मुख्य रूप से इस बात पर चर्चा होनी है कि किन सीटों पर किस पार्टी का उम्मीदवार चुनाव मैदान में उतरेगा।
संकेत हैं कि आगामी विधानसभा चुनाव में दोनों दल वर्ष 2017 के गठबंधन वाले फार्मूले को दोहरा सकते हैं। इस व्यवस्था के तहत कांग्रेस के हिस्से में 105 से 115 सीटें आ सकती हैं। कुछ सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार मजबूत होने की स्थिति में वे कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर भी मैदान में उतर सकते हैं।
कांग्रेस ने चुनाव को देखते हुए अपनी सांगठनिक तैयारियों को लगभग अंतिम रूप दे दिया है। पार्टी ने उत्तर प्रदेश में संगठन सृजन अभियान के तहत जिलाध्यक्षों के नए चयन की प्रक्रिया भी पूरी कर ली है। केंद्रीय पर्यवेक्षकों, प्रदेश अध्यक्ष अजय राय, प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम और विधानमंडल दल के नेता की राष्ट्रीय नेतृत्व के साथ बैठक हो चुकी है।
इसके बाद प्रदेश के नेताओं ने पार्टी की वरिष्ठ नेता सोनिया गांधी से मुलाकात की, जिसमें समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन को लेकर भी चर्चा हुई। पार्टी नेतृत्व की ओर से स्पष्ट संदेश दिया गया है कि चुनाव समाजवादी पार्टी के साथ बेहतर तालमेल बनाकर लड़ना है। समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव ने भी अपने कार्यकर्ताओं को कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने का संदेश दिया है।
एक वरिष्ठ नेता के अनुसार कांग्रेस ने अपने स्तर पर सर्वे कर करीब 150 ऐसी सीटों की पहचान की है, जहां पार्टी मजबूती से चुनाव लड़ सकती है और उसके पास उपयुक्त उम्मीदवार हैं। प्रदेश स्तर के नेता अधिक सीटों की मांग करते रहे हैं, लेकिन दोनों दलों के वरिष्ठ नेताओं के सामने वर्ष 2017 का फार्मूला मौजूद है।
वर्ष 2017 में कांग्रेस ने 114 सीटों पर चुनाव लड़ा था। इनमें 105 सीटों पर कांग्रेस के उम्मीदवार थे, जबकि नौ सीटों पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी कांग्रेस के चुनाव चिह्न पर मैदान में उतरे थे। आगामी चुनाव में भी लगभग इसी तरह की व्यवस्था अपनाए जाने की संभावना जताई जा रही है।
कांग्रेस नेताओं का मानना है कि समाजवादी पार्टी के कुछ स्थानीय नेता भले ही कांग्रेस को 40 से 50 सीटें मिलने की बात करते रहे हों, लेकिन पार्टी का शीर्ष नेतृत्व राहुल गांधी की बढ़ती स्वीकार्यता को नजरअंदाज नहीं कर सकता। नेताओं के अनुसार जनता के मुद्दों को उठाने से विभिन्न वर्गों में राहुल गांधी का प्रभाव बढ़ा है।
दोनों दलों के पारंपरिक मतदाताओं के साथ भाजपा विरोधी और नए विकल्प की तलाश कर रहे मतदाताओं के बीच भी राहुल गांधी की पकड़ मजबूत होने का दावा किया गया है। बिहार में महागठबंधन के भीतर सामने आई खींचतान से सबक लेते हुए समाजवादी पार्टी और कांग्रेस उत्तर प्रदेश में बेहतर समन्वय के साथ चुनावी रणनीति तैयार करने पर ध्यान दे रहे हैं।















