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संपादकीय
08 Sep, 2026

फोरलेन और उद्योग की मांग, चबूतरा-शेड के दिन गए

मध्यप्रदेश में बढ़ती मतदाता जागरूकता के बीच जनप्रतिनिधियों की प्राथमिकताएं बदल रही हैं और अब सड़क, उद्योग, शिक्षा तथा पुराने निर्माणों के रखरखाव की मांग प्रमुख हो गई है।

भोपाल, 08 सितंबर।

मध्यप्रदेश की राजनीति में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। प्रदेश के ज्यादातर मंत्री, सांसद और विधायक अब क्षेत्र में टू-लेन और फोरलेन सड़कों का निर्माण चाहते हैं तो कुछ औद्योगिक सेक्टर विकसित कराने पर जोर दे रहे हैं। लगभग हर दूसरे जनप्रतिनिधि को क्षेत्र में उद्योग चाहिए, जहां क्षेत्र के लोगों को रोजगार व स्वरोजगार से जोड़ा जा सके। इसके लिए वे मुख्यमंत्री कार्यालय को पत्र भेज रहे हैं। कुछ अपनी मांगें मनवाने में सफल भी हो चुके हैं।

हाल में स्वीकृत हुए भोपाल से विदिशा, सिवनी से बालाघाट और बीना से खिमलासा-मालथौन फोरलेन जैसे मार्गों के पीछे ऐसे ही कई माननीयों का हाथ है। यही नहीं, वे नए कामों के साथ ही पुराने कामों के मेंटेनेंस के लिए भी अलग से बजट चाहते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि 15 से 30 वर्ष पहले क्षेत्र में हुए अधोसंरचनात्मक काम अब मेंटेनेंस मांग रहे हैं। समय रहते मेंटेनेंस नहीं कराया तो जनता भड़क जाएगी।

असल में राजनीति करना बड़ी प्रतिस्पर्धा हो चला है। राजनीतिक मामलों के जानकार यश भारतीय का कहना है कि पहले बगैर काम के कई जनप्रतिनिधि लंबे समय तक चुनाव जीत लेते थे। अभी भी मध्यप्रदेश के दूरस्थ व आदिवासी अंचलों में यह स्थिति है, लेकिन जो क्षेत्र शिक्षा से काफी पहले जुड़ चुके हैं, वहां जागरूकता आई है। नतीजा यह है कि लोग अपने जनप्रतिनिधियों से अप्रत्यक्ष रूप से हिसाब मांगने के लिए तैयार हैं। दूसरी तरफ काम नहीं करने वाले कई जनप्रतिनिधियों को इस बात का भय है कि चुनाव में कहीं वे बहिष्कार का शिकार तो नहीं हो जाएंगे।

पिछले विधानसभा चुनावों के दौरान बिहार और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में यह स्थिति देखने को मिल चुकी है। ऐसे में जनप्रतिनिधि समझ चुके हैं कि काम ही वह आधार है, जिसके आधार पर जनता का सामना कर पाएंगे। इसलिए जागरूक जनप्रतिनिधि भी अब कोई खतरा उठाने की स्थिति में नहीं हैं और सरकार के सामने क्षेत्र की जरूरत को रख रहे हैं।

उन्हें अपने क्षेत्र में पूर्व में हो चुके अधोसंरचनात्मक कार्यों के मेंटेनेंस के लिए अलग से बजट भी चाहिए। उनके क्षेत्र में पहले जो सड़कें बनी थीं, वे अब टूट गई हैं और पुल कमजोर हो गए हैं। अगर उनका मेंटेनेंस नहीं हुआ तो नई सड़क बनाने का कोई अर्थ नहीं रहेगा। इसलिए वे मेंटेनेंस के लिए अलग बजट मांग रहे हैं।

लोग अब समझ चुके हैं कि जब तक क्षेत्र में अच्छी और टिकाऊ सड़कें नहीं होंगी, औद्योगिक गतिविधियों की कल्पना नहीं कर सकते। बांधों के बगैर सिंचाई नहीं होगी और जमीन होने के बावजूद पैदावार नहीं ले पाएंगे। अच्छे स्कूल-कॉलेजों के बगैर बच्चों का शैक्षणिक विकास संभव नहीं होगा। अब लोग सादगीपूर्ण तरीके से जनप्रतिनिधियों को उन कामों को करने के लिए विवश कर रहे हैं, जिनकी जरूरत है।

जबकि सत्तापक्ष के कुछ विधायक अब भी ट्रांसफर-पोस्टिंग और शिकवा-शिकायतों में उलझे हैं। ऐसे जनप्रतिनिधियों से जुड़े क्षेत्रों में विकास का बुरा हाल है। यह अंतर ही बताता है कि कौन जनता के साथ है और कौन केवल पद के साथ। सरकार के सामने सत्ता पक्ष के हर दूसरे चुने हुए जनप्रतिनिधि अधोसंरचनात्मक कामों की मांग कर रहे हैं।

सरकार के सामने चुनौती है कि वह हर दूसरे चुने हुए जनप्रतिनिधि की मांग को कैसे पूरा करे। बजट सीमित है, लेकिन मांगें बड़ी हैं। फिर भी मुख्यमंत्री कार्यालय में इन पत्रों पर गंभीरता से विचार हो रहा है और कुछ पर अमल भी शुरू हो गया है।

असल में जनप्रतिनिधियों का एक बड़ा तबका लंबे समय तक जनता को चबूतरा और शेड निर्माण जैसे कामों में उलझाए रखता आया है। बीते कुछ वर्षों में समय के साथ लोग जागरूक हुए और अपने अधिकारों की बात करने लगे हैं। वे क्षेत्र में ठोस काम चाहते हैं, जिसमें सभी का भला जुड़ा हो। सामाजिक एवं आदिवासी मामलों के जानकार राजकुमार सिन्हा का कहना है कि लोग समझ चुके हैं कि जब तक क्षेत्र में अच्छी और टिकाऊ सड़कें नहीं होंगी, औद्योगिक गतिविधियों की कल्पना नहीं की जा सकती।

मध्यप्रदेश में लंबे समय से विधानसभा की कार्यवाही को ऑनलाइन किए जाने के प्रयास हो रहे हैं, लेकिन अब तक कार्यवाही का सीधा प्रसारण शुरू नहीं हो पाया है। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार कई बार मांग उठा चुके हैं। विधायक हीरालाल अलावा का कहना है कि कई सदस्य क्षेत्र के मुद्दे नहीं उठाते, केवल हां में हां मिलाते हैं। विधानसभा सत्रों की कार्यवाहियों के अवलोकन से यह बात साफ है कि क्षेत्र के मुद्दों व विकास की कई सदस्यों को चिंता ही नहीं है। ऐसे सदस्य कार्यवाही के सीधे प्रसारण से बेनकाब होंगे।

कुल मिलाकर मध्यप्रदेश की राजनीति में एक नया अध्याय शुरू हो रहा है, जहां चबूतरा और शेड की राजनीति खत्म हो रही है और फोरलेन सड़क, उद्योग और शिक्षा की बात हो रही है। जनप्रतिनिधियों को चुनाव में बहिष्कार का भय सता रहा है। लोकतंत्र के लिए यह शुभ संकेत है, क्योंकि जब जनता हिसाब मांगेगी, तभी विकास होगा और यही बदलाव प्रदेश को आगे ले जाएगा।

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आज का राशिफल

व्ययाधिक्य का अवसर आ सकता है। लाभदायक कार्यों की चेष्टाएं प्रबल होंगी। बुद्घितत्व की सक्रियता से अल्प लाभ का हर्ष होगा। कुछ महत्वपूर्ण कार्य बनाने के लिए भाग-दौड़ रहेगी। लाभकारी गतिविधियों में सक्रियता रहेगी। रुका हुआ लाभ आज प्राप्त हो सकता है। धार्मिक स्थलों की यात्रा का योग। शुभांक-4-6-8

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