उज्जैन, 09 सितंबर।
मध्य प्रदेश के धार्मिक नगर उज्जैन में कंठाल चौराहे से गोपाल मंदिर तक सड़क चौड़ीकरण के कार्य के दौरान मार्ग में आने वाला प्रसिद्ध खड़े हनुमान मंदिर इन दिनों चर्चा का केंद्र बना हुआ है। प्रशासनिक अमले द्वारा मंदिर का ढांचा हटाने के पश्चात एक सप्ताह की समयावधि में हनुमानजी की प्रतिमा को अन्यत्र स्थानांतरित करने के तीन असफल प्रयास किए जा चुके हैं।
स्थानीय श्रद्धालुओं का मानना है कि यह सब भगवान की मर्जी के कारण हो रहा है, जिसके चलते उन्होंने इस विस्थापन प्रक्रिया को पूरी तरह रोकने की मांग उठाई है। लोगों का तर्क है कि वर्तमान समय में हनुमानजी की मूर्ति का मुख दक्षिण दिशा की ओर है, जबकि प्रशासन द्वारा टंकी चौराहे पर जो नया स्थान तय किया गया है, वहां प्रतिमा का मुख उत्तर दिशा की ओर हो जाएगा।
भक्तों का ऐसा मानना है कि दिशा बदलने से इस प्राचीन मंदिर के धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इस पूरे घटनाक्रम से जुड़े तमाम वीडियो सोशल मीडिया पर भी काफी तेजी से वायरल हो रहे हैं, जिसके बाद से ही स्थानीय भक्तों ने इस कार्रवाई के विरोध का पुख्ता मन बना लिया है।
उज्जैन के सती गेट के निकट स्थित इस चर्चित मंदिर को हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई पिछले दस दिनों से लगातार जारी है। मंदिर परिसर के आसपास के ज्यादातर हिस्सों को तोड़ा जा चुका है, किंतु हनुमानजी की पवित्र प्रतिमा वर्तमान में एक टेंट के भीतर ही विराजमान है।
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान प्रशासन मूर्ति को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से हटाने के लिए आवश्यक सावधानी बरत रहा है। पिछले शुक्रवार और शनिवार को स्थानीय नगर निगम, जिला प्रशासन और पुलिस बल के अधिकारी लगातार मौके पर मुस्तैद नजर आए तथा मंदिर के चारों ओर सुरक्षा की दृष्टि से बैरिकेडिंग भी कर दी गई।
दूसरी तरफ, विभिन्न हिंदूवादी संगठनों से जुड़े कार्यकर्ता इस मंदिर को हटाए जाने का पुरजोर विरोध कर रहे हैं। विरोध प्रदर्शन के दौरान कुछ लोगों ने तो यहां तक कह दिया कि यदि गोली चलने की नौबत भी आ जाए, तब भी वे हनुमानजी की इस प्रतिमा को अपनी जगह से हिलने नहीं देंगे।
प्रशासनिक कार्रवाई के दौरान टीम के दो बार बैरंग लौटने के बाद यह मामला सोशल मीडिया की सुर्खियों में आ गया। एक पूर्व पार्षद का रोते हुए वीडियो इंस्टाग्राम और फेसबुक जैसे प्लेटफॉर्म पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद से ही बड़ी संख्या में लोग वहां रील बनाने के लिए पहुँचने लगे।
महाकाल की राजसी सवारी निकलने के बाद यह कयास लगाए जाने लगे थे कि मंगलवार को प्रशासनिक अमला एक बार फिर मंदिर के विस्थापन के लिए आ सकता है। इसे भांपते हुए सुबह से ही बड़ी संख्या में आम भक्त, हिंदूवादी कार्यकर्ता और महामंडलेश्वर शैलेशानंद मौके पर एकत्र हो गए।
भारी भीड़ के बीच उपस्थित श्रद्धालुओं ने मंदिर के सामने बैठकर सामूहिक रूप से हनुमान चालीसा का पाठ किया और अपना कड़ा विरोध दर्ज कराया। लोगों ने जमकर नारेबाजी की और चेतावनी दी कि किसी भी कीमत पर खड़े हनुमानजी के इस मंदिर को यहां से नहीं हटाया जाने दिया जाएगा।
हिंदूवादी संगठन के प्रतिनिधि रुपेश ठाकुर ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि सरकार विकास के नाम पर अब तक साठ मंदिर हटा चुकी है, लेकिन खड़े हनुमान को जानबूझकर प्रतिष्ठा का विषय बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि भगवान से उलझने वाले लोग मिट जाते हैं और महापौर तथा पार्षदों को अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
वहीं एक अन्य पुराने श्रद्धालु ने साझा किया कि वह सन 1987 में पहली बार इस मंदिर में आए थे और नास्तिक होने के बावजूद हनुमानजी के चमत्कार ने उन्हें उनका पक्का भक्त बना दिया। भक्तों का बस यही कहना है कि यदि विस्थापन हो भी, तो इस दौरान हनुमानजी की प्रतिमा किसी भी स्थिति में खंडित नहीं होनी चाहिए।















