मुंबई, 9 सितंबर।
अजय देवगन की ‘दृश्यम’ और ‘दृश्यम 2’ के बाद अब तीसरी फिल्म ‘दृश्यम: द कन्क्लूजन’ को लेकर दर्शकों में उत्सुकता है। ट्रेलर सामने आने के बाद फिल्म की कहानी को लेकर चर्चा भी शुरू हो गई है। अजय देवगन फिर विजय सालगांवकर के किरदार में परिवार को बचाने की कोशिश करते दिख रहे हैं।
ट्रेलर में एक बार फिर परिवार पर संकट, पुलिस का दबाव और विजय का अपने बचाव के लिए दिमाग लगाने वाला पुराना ढांचा नजर आता है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि तीसरी फिल्म में दर्शकों को नया क्या देखने को मिलेगा।
फिल्म में तब्बू बदले की भावना के साथ वापसी कर रही हैं। प्रकाश राज नए वकील और जयदीप अहलावत अपराध शाखा के पुलिस अधीक्षक की भूमिका में दिखाई दे रहे हैं। नए किरदारों के जुड़ने से कहानी का दायरा बढ़ता दिख रहा है, लेकिन ट्रेलर में संवाद और टकराव का जोर अधिक नजर आता है।
पहली दोनों फिल्मों की खासियत उनका शांत माहौल और दिमागी खेल था। इस बार कहानी को अधिक आक्रामक और तनावपूर्ण बनाने की कोशिश दिखाई दे रही है। इससे पुराने दर्शकों के मन में यह सवाल भी है कि क्या नई फिल्म वही प्रभाव कायम रख पाएगी।
अजय देवगन का संवाद, ‘अब ये खेल दिमाग का नहीं, नसीब का बन चुका है’, कहानी की दिशा का संकेत देता है। हालांकि, अगर फिल्म बदले, धमकी और बड़े टकराव तक सीमित रहती है तो पिछली फिल्मों जैसा असर दोहराना चुनौतीपूर्ण हो सकता है।
फिलहाल ट्रेलर में खतरा बड़ा दिखाई देता है, लेकिन कहानी में कितना नयापन है, इसका स्पष्ट जवाब नहीं मिलता। अब यह देखना अहम होगा कि ‘दृश्यम 3’ इस फ्रेंचाइजी को दमदार अंत देती है या पुराने फॉर्मूले को ही दोहराती है।















