नई दिल्ली, 9 सितंबर।
भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण ने राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में पौधारोपण और हरित विकास को लेकर नए सख्त दिशानिर्देश लागू किए हैं। अब किसी परियोजना को अस्थायी पूर्णता प्रमाणपत्र या अस्थायी वाणिज्यिक संचालन की अनुमति तभी मिलेगी, जब पौधारोपण के लिए तय क्षेत्र के कम से कम 80 प्रतिशत हिस्से में पौधे लगाए जा चुके हों और उनमें कम से कम 90 प्रतिशत पौधे जीवित हों।
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय के अनुसार राष्ट्रीय राजमार्गों के मध्य भाग और किनारों पर पौधारोपण को अब परियोजना के विकास और पूर्णता का जरूरी हिस्सा माना जाएगा। इसके लिए हरित राजमार्ग नीति-2015, भारतीय सड़क कांग्रेस के दिशानिर्देशों तथा मंत्रालय और एनएचएआई के अन्य निर्धारित मानकों का पालन करना होगा।
यदि किसी परियोजना में तय क्षेत्र के 80 प्रतिशत से कम हिस्से में पौधारोपण पाया जाता है तो इसकी जानकारी दर्ज की जाएगी और बाकी काम पूरा करने की समयसीमा तय होगी। लक्ष्य पूरा होने तक संविदा प्रावधानों के तहत भुगतान की कुछ राशि रोकी भी जा सकेगी।
संचालन और रखरखाव अवधि में भी पौधारोपण की निगरानी जारी रहेगी। ईपीसी, हाइब्रिड एन्युटी मॉडल और बीओटी-एन्युटी परियोजनाओं में संचालन एवं रखरखाव या वार्षिकी भुगतान तथा बीओटी-टोल परियोजनाओं में रखरखाव अनुपालन का आकलन पौधों की कम से कम 90 प्रतिशत जीवित रहने की दर के आधार पर होगा।
दिशानिर्देशों में सूख चुके या नष्ट हुए पौधों की जगह समान आयु और विकास वाले नए पौधे लगाने का प्रावधान किया गया है। इससे राजमार्गों पर हरित क्षेत्र की निरंतरता और पौधों का घनत्व बनाए रखने में मदद मिलेगी। भुगतान जारी करने या रखरखाव अनुपालन प्रमाणित करने से पहले पर्यावरण और पौधारोपण विशेषज्ञों की तकनीकी मदद से स्थल का सत्यापन भी कराया जाएगा।
एनएचएआई के अनुसार पहले राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं में पौधारोपण से जुड़े संविदात्मक दायित्वों को अस्थायी पूर्णता या संचालन प्रमाणपत्र जारी करते समय पर्याप्त महत्व नहीं मिलता था। नए नियमों का उद्देश्य पर्यावरणीय स्थिरता और हरित राजमार्ग विकास को परियोजना निर्माण तथा रखरखाव प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाना है।















