भोपाल, 9 सितंबर।
राजधानी में सोमवार आधी रात करीब 12 बजे शराब की दुकान के बाहर नाबालिग बालिका के लड़कों के साथ बाइक पर बैठकर सिगरेट और शराब पीते मिलने से कई सवाल खड़े हो गए। मध्य प्रदेश बाल अधिकार संरक्षण आयोग की अध्यक्ष डॉ. निवेदिता शर्मा की नजर पड़ने पर उन्होंने गाड़ी रुकवाकर बालिका से पूछताछ की। स्थिति संदिग्ध लगने पर 100 डायल कर पुलिस को बुलाया गया। मौके पर मौजूद कई लोग भाग गए, वहीं पुलिस ने एक बालिग युवक को पकड़ लिया।
पूछताछ में बालिका ने बताया कि वह अकेली रहती है और पिता के शराबी होने के कारण उनके साथ नहीं रहती। आयोग अध्यक्ष ने सवाल किया कि यदि वह शराब के कारण पिता से अलग रहती है तो आधी रात शराब की दुकान के बाहर खुद शराब और सिगरेट क्यों पी रही थी। इस पर वह चुप हो गई। इसके बाद उसके बयान लगातार बदलते रहे। उसने पहले भानपुर, फिर मानपुर और बाद में अशोकागार्डन का पता बताया।
रोजगार के बारे में पूछने पर बालिका ने छह हजार रुपये मासिक नौकरी करने और पढ़ाई छोड़ने की बात कही। काम की जगह पूछने पर उसने केवल बाजार बताया और यह स्पष्ट नहीं कर सकी कि कौन-सा बाजार। उसने कहा कि नौकरी अभी नई लगी है। उसके आधार कार्ड की वास्तविकता पर भी मौके पर संदेह जताया गया। इसलिए उसकी उम्र, पहचान, परिवार, निवास और रोजगार से जुड़े दस्तावेजों की जांच अब पुलिस के लिए महत्वपूर्ण होगी।
पूछताछ के दौरान बालिका ने मामले को वहीं समाप्त करने की बात कहते हुए पुलिस को बीच में लाने पर सवाल उठाया। इससे उसके किसी दबाव में होने या किसी समूह के संपर्क में होने की आशंका को लेकर भी जांच की जरूरत सामने आई। साथ मौजूद युवक ने दावा किया कि वे बालिका के लिए बीमारी की दवा लेने आए थे, लेकिन दवा के पर्चे पर किसी अन्य महिला का नाम मिला।
कानून के अनुसार ऐसी स्थिति में बच्ची को केवल आरोपी के तौर पर नहीं देखा जाता, बल्कि उसके संरक्षण की जरूरत भी होती है। जुवेनाइल जस्टिस अधिनियम की धारा 77 में बच्चे को शराब, नशीले पदार्थ या तंबाकू उत्पाद देने वाले व्यक्ति के लिए सात वर्ष तक के कठोर कारावास और एक लाख रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान है। नियमों के तहत पुलिस को यह पता लगाना होता है कि नशे की सामग्री बच्चे तक कैसे पहुंची।
अब जांच में बालिका की वास्तविक उम्र, पहचान और पारिवारिक पृष्ठभूमि के साथ यह भी पता लगाया जाएगा कि उसे शराब और तंबाकू किसने उपलब्ध कराया और उसके साथ मौजूद लोगों की क्या भूमिका थी। बालिका को संरक्षण, परामर्श और आवश्यक पुनर्वास की सुविधा मिलना भी महत्वपूर्ण होगा। घटना ने राजधानी में बच्चों तक नशे की पहुंच और उनकी सुरक्षा से जुड़े सवालों को गंभीर बना दिया है।















