इस्लामाबाद, 09 सितंबर।
पाकिस्तान के बलोचिस्तान प्रांत के खारान और पंजगुर जिलों में सेना के काफिलों पर ताबड़तोड़ हमले किए जाने की चौंकाने वाली खबर सामने आई है। हथियारबंद हमलावरों ने सेना के वाहनों को निशाना बनाते हुए भीषण हमले को अंजाम दिया। इन हमलों में एक हजार तक सैन्यकर्मियों के मारे जाने या घायल होने का बड़ा दावा किया गया है। हालांकि इस मामले पर पाकिस्तानी सरकार या सैन्य अधिकारियों की तरफ से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक स्थानीय सूत्रों ने बताया कि खारान शहर के पास उग्रवादियों ने पाकिस्तानी सेना की कम से कम तीन गाड़ियों को सीधी गोलीबारी का शिकार बनाया। इस भारी हमले के दौरान करीब एक हजार सैनिकों के हताहत होने की बात सामने आई है। हालांकि किसी भी विद्रोही संगठन ने तुरंत इस घटना की जिम्मेदारी नहीं ली है। सुरक्षा और प्रशासनिक हलकों में इस हमले के बाद से हड़कंप मचा हुआ है।
इसके साथ ही पंजगुर जिले के प्रोम क्षेत्र में बंदूकधारियों ने सेना का राशन ले जा रहे एक वाहन को आग के हवाले कर दिया। हमलावरों ने इस दौरान एक अन्य गाड़ी पर भी अपना कब्जा जमा लिया। इसके अलावा पंजगुर के चिडगी इलाके में एक रिहायशी जगह पर आगजनी की घटना सामने आई है, जहां हथियारबंद लोगों ने पाकिस्तानी सेना द्वारा लगाए गए गुप्त निगरानी कैमरों को पूरी तरह तोड़कर नष्ट कर दिया।
पुरानी रिपोर्टों के अनुसार बलोच लिबरेशन आर्मी के मीडिया विंग द्वारा पूर्व में जारी आंकड़ों में भी सुरक्षा बलों और सैन्य ठिकानों पर सैकड़ों हमलों का जिक्र किया गया है। इन पुराने संघर्षों और विशेष दस्तों की कार्रवाई में भी एक हजार से अधिक सैनिकों के मारे जाने या गंभीर रूप से घायल होने के दावे किए जाते रहे हैं। मौजूदा वर्ष के दौरान मस्तुंग, क्वेटा, कलात और बोलन जैसे क्षेत्रों में व्यापक पैमाने पर टकराव देखने को मिला है।
पाकिस्तानी सरकार और सेना का जनसंपर्क विभाग आमतौर पर बलोच विद्रोही गुटों द्वारा किए जाने वाले ऐसे सभी दावों को खारिज करता आया है या फिर हताहतों की संख्या बेहद कम बताता है। दूसरी ओर पाकिस्तानी सेना भी इस इलाके में उग्रवादियों के खिलाफ बड़े स्तर पर सैन्य अभियान चला रही है। इन ऑपरेशनों में सैकड़ों लड़ाकों को मार गिराए जाने के दावे किए जाते हैं। संघर्षग्रस्त इलाका होने और मीडिया पर भारी प्रतिबंधों के कारण दोनों पक्षों के इन बड़े आंकड़ों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि करना बेहद कठिन है।
एक अन्य घटना के संबंध में संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार विशेषज्ञों ने बलोचिस्तान के निवासी इमरान अली को जबरन अगवा किए जाने और उसकी न्यायेतर हत्या पर गहरी चिंता व्यक्त की है। विशेषज्ञों ने पाकिस्तान सरकार से इस पूरे मामले की त्वरित और पूरी तरह निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। बताया गया है कि पिछले साल 27 अगस्त को आतंकवाद रोधी दस्ते के करीब बीस अधिकारियों ने अली को उसके अपार्टमेंट से कथित रूप से उठाया था और उसे किसी गुप्त स्थान पर ले गए थे।
पीड़ित के परिजनों को पूरे एक साल तक इस बात की कोई जानकारी नहीं मिल पाई कि वह कहां है और उसके साथ क्या बीती। हालांकि अली के साथ हिरासत में बंद रहे कुछ अन्य लोगों ने रिहाई के बाद पुष्टि की थी कि उसे गैरकानूनी तरीके से बंधक बनाकर रखा गया था। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की विज्ञप्ति के अनुसार पूछताछ और हिरासत के दौरान अली को कई दिनों तक गंभीर शारीरिक यातनाएं दी गई थीं।
विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अधिकारी किसी व्यक्ति को हिरासत में लेने के बाद उसकी मौजूदगी से इनकार करें या ठिकाने की जानकारी छिपाएं तो उसे जबरन गायब किया जाना माना जाता है। इस स्थिति में पीड़ित व्यक्ति कानूनी संरक्षण से पूरी तरह वंचित हो जाता है और यह अंतरराष्ट्रीय कानून के मूल सिद्धांतों का खुला उल्लंघन है। ऐसे मामलों की जांच कर रहे पाकिस्तानी आयोग के समक्ष पिछले माह हुई सुनवाई के दौरान पुलिस अधिकारी ने स्वीकार किया कि अली की मई महीने में एक मुठभेड़ के दौरान मौत हो गई थी।
पुलिस अधिकारियों को उसके शव की पहचान करने में लगभग एक महीने का लंबा समय लग गया। अधिकारियों ने सफाई दी कि वे शव को सुरक्षित रखने में असमर्थ थे इसलिए उसे जून महीने में ही दफना दिया गया। इस खुलासे के बाद अली के परिवार के लोग क्वेटा के सिविल अस्पताल पहुंचे और वहां के रिकॉर्ड की तस्वीरों के आधार पर शव की शिनाख्त की।
मृतक अली का शव कथित तौर पर छह अन्य अज्ञात शवों के साथ अस्पताल लाया गया था। अस्पताल के कर्मियों और स्थानीय पुलिस ने इनमें से किसी भी शव से संबंधित कोई दस्तावेज तैयार नहीं किया और न ही कोई औपचारिक सूचना दर्ज की। इन सभी शवों को बिना पहचान किए और परिवारों को बिना बताए चुपचाप दफना दिया गया। मानवाधिकार विशेषज्ञों ने आशंका जताई है कि बलोचिस्तान में सामने आ रहे ऐसे अन्य मामलों में दफनाए गए शव भी जबरन गायब किए गए लोगों के हो सकते हैं।















