भोपाल, 09 सितंबर।
मध्य प्रदेश में स्टाइपेंड बढ़ाने की मांग को लेकर इंटर्न डॉक्टरों का अनिश्चितकालीन आंदोलन आज बुधवार को लगातार तीसरे दिन भी पूरे जोश के साथ जारी है। राजधानी भोपाल के कमला पार्क के समीप सड़क पर डेरा डाले बैठे डॉक्टरों ने आज भी नियमित रूप से ओपीडी और इलेक्टिव ऑपरेशन थिएटर सेवाओं के पूर्ण बहिष्कार का ऐलान किया है। हालांकि, आम जनता की परेशानी को ध्यान में रखते हुए आपातकालीन सेवाओं को इस प्रदर्शन से पूरी तरह बाहर रखा गया है।
अपनी मुख्य मांगों को दोहराते हुए आंदोलनकारी डॉक्टरों का कहना है कि उनका मासिक स्टाइपेंड बढ़ाकर तीस हजार रुपये किया जाना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक सरकार की ओर से इस मामले में कोई ठोस और लिखित आदेश नहीं मिल जाता, तब तक उनका यह विरोध प्रदर्शन जारी रहेगा। दूसरी तरफ, सरकार इस गतिरोध को खत्म करने के लिए डॉक्टरों के प्रतिनिधियों के साथ लगातार बातचीत के प्रयास कर रही है।
राजधानी भोपाल में सोमवार से शुरू हुए इस धरने के तहत इंटर्न डॉक्टरों ने मंगलवार की पूरी रात सड़क पर ही बिताई। प्रदर्शन की जगह पर ही उनके खाने-पीने और रात गुजारने के लिए गद्दों का पूरा इंतजाम किया गया था। पुलिस और जिला प्रशासन की तरफ से यातायात व्यवस्था सुधारने के लिए सड़क खाली करने की अपील की गई, लेकिन डॉक्टरों ने साफ इंकार कर दिया। इस धरने के कारण पुराने शहर के कई हिस्सों में ट्रैफिक की समस्या जरूर पैदा हुई है, हालांकि डॉक्टर एंबुलेंस जैसे जरूरी वाहनों को रास्ता दे रहे हैं।
इस आंदोलन को अब अन्य मेडिकल छात्रों और चिकित्सकों का भी भरपूर समर्थन मिलने लगा है। गांधी मेडिकल कॉलेज भोपाल के सीनियर रेजिडेंट्स भी अब इस हड़ताल में कूद पड़े हैं और जूनियर डॉक्टर्स एसोसिएशन के साथ मिलकर ओपीडी सेवाओं के बहिष्कार का फैसला किया है। इंदौर के महाराजा यशवंतराव अस्पताल और खंडवा मेडिकल कॉलेज समेत प्रदेश के अन्य जिलों से भी डॉक्टरों के प्रदर्शन की खबरें आ रही हैं, जिससे स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित हुई है।
भोपाल के बड़े हमीदिया अस्पताल में डॉक्टरों के काम पर नहीं लौटने के कारण ओपीडी में आने वाले मरीजों को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल में उमड़ने वाली भारी भीड़ को संभालने के लिए अब प्रोफेसरों और सीनियर डॉक्टरों को खुद ओपीडी संभालनी पड़ रही है, हालांकि आपातकालीन सेवाएं सुचारू रूप से चल रही हैं।
इस आंदोलन के तूल पकड़ने के पीछे सोमवार को प्रदर्शन के दौरान पुलिस द्वारा पानी की बौछार यानी वाटर कैनन के इस्तेमाल पर भी डॉक्टरों में भारी गुस्सा है। मुख्यमंत्री आवास की तरफ मार्च कर रहे डॉक्टरों को रोकने के लिए पुलिस ने बल प्रयोग किया था, जिस पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घटना की उच्चस्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। मेडिकल टीचर्स एसोसिएशन ने भी इस घटना पर अपनी नाराजगी जताते हुए मामले को संवेदनशीलता से सुलझाने की बात कही है।
हड़ताल खत्म कराने के लिए प्रशासनिक स्तर पर लगातार प्रयास जारी हैं और स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र शुक्ल पहले ही डॉक्टरों के नुमाइंदों से चर्चा कर चुके हैं। भोपाल कलेक्टर प्रियंक मिश्रा ने भी मंगलवार को धरना स्थल पर पहुंचकर डॉक्टरों से बातचीत की। प्रशासन का कहना है कि उच्च स्तर पर मंथन चल रहा है, जबकि डॉक्टरों की जिद है कि लिखित आदेश मिलने तक उनका यह आंदोलन थमेगा नहीं।















