नई दिल्ली, 9 सितंबर।
वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र और आसपास के इलाकों में निर्माण एवं विध्वंस स्थलों की निगरानी में गंभीर कमियां मिलने पर हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को कड़ी फटकार लगाई है। इस मुद्दे पर 8 सितंबर को आयोग के अध्यक्ष राजेश वर्मा की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई।
आयोग के अनुसार, 500 वर्गमीटर या उससे अधिक क्षेत्र में चलने वाली सभी निर्माण एवं विध्वंस परियोजनाओं का पंजीकरण जरूरी है। साथ ही धूल नियंत्रण उपायों की दूरस्थ निगरानी के लिए चालू वीडियो निगरानी व्यवस्था को राज्य के वेब पोर्टल से जोड़ना भी अनिवार्य किया गया है।
आयोग वर्ष 2024 से हरियाणा बोर्ड के वेब पोर्टल के माध्यम से निर्माण स्थलों की दूरस्थ निगरानी कर रहा है। इस दौरान कैमरों के अधूरे संपर्क, गलत उपयोगकर्ता पहचान और पासवर्ड, मोबाइल अनुप्रयोग डाउनलोड करने वाले संपर्क, खराब वेब संपर्क और लंबे समय तक कैमरों के बंद रहने जैसी खामियां सामने आईं।
19 से 22 जून 2026 के बीच आयोग ने पानीपत के 213, सोनीपत के 457, फरीदाबाद के 168, गुरुग्राम उत्तर के 691 और गुरुग्राम दक्षिण के 484 पंजीकृत निर्माण स्थलों की जांच की। अधिकांश जगह कैमरे काम नहीं कर रहे थे। फरीदाबाद में केवल चार, गुरुग्राम उत्तर में छह और गुरुग्राम दक्षिण में पांच स्थलों पर कैमरे चालू मिले।
आयोग ने अपनी जांच रिपोर्ट 8 जुलाई को बोर्ड को भेजी थी। इससे पहले भी प्रभावी निगरानी के लिए अलग टीम गठित करने की सलाह दी गई थी, लेकिन ऐसी टीम नहीं बनाई गई और स्थिति में भी उल्लेखनीय सुधार नहीं हुआ।
लगातार कमियों को आयोग ने अपने वैधानिक निर्देशों की जानबूझकर अवहेलना माना। बैठक में बोर्ड से विस्तृत जवाब और अनुपालन रिपोर्ट मांगी गई। बोर्ड ने अब तक किए गए कार्यों और अनुपालन की स्थिति की जानकारी आयोग को दी।
आयोग ने सभी आदेशों और वैधानिक निर्देशों का सख्ती से पालन कराने, नियम तोड़ने वाले निर्माण स्थलों को बंद करने और दूरस्थ निगरानी व्यवस्था को पूरी तरह चालू करने के निर्देश दिए। अधिकारियों से निगरानी और कार्रवाई की व्यवस्था मजबूत करने तथा निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण उपाय प्रभावी ढंग से लागू कराने को भी कहा गया।
आयोग ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में वायु प्रदूषण की रोकथाम और नियंत्रण के लिए उसके वैधानिक निर्देशों का प्रभावी पालन बेहद जरूरी है।















