प्रयागराज, 09 सितंबर।
इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में स्पष्ट किया है कि किसी भी उम्मीदवार के विरुद्ध केवल आपराधिक मामला दर्ज होने मात्र से ही उसे पुलिस सेवा जैसे महत्वपूर्ण विभाग में नियुक्ति के लिए स्वतः अयोग्य नहीं माना जा सकता है, क्योंकि ऐसे मामलों में पात्रता का निर्धारण अपराध की प्रकृति और परिस्थितियों के आधार पर किया जाना चाहिए।
न्यायमूर्ति जे. जे. मुनीर तथा न्यायमूर्ति इंद्रजीत शुक्ला की खंडपीठ ने राज्य सरकार की विशेष अपील को खारिज करते हुए कहा कि अलीगढ़ में नागरिक पुलिस कांस्टेबल के रूप में चयनित और बाद में फिरोजाबाद में प्रशिक्षण के दौरान हटाए गए इस कर्मी के मामले में अधिकारियों ने यांत्रिक तरीके से कार्रवाई की थी क्योंकि वह व्यक्ति बाद में वर्ष 1997 में ही आपसी समझौते के आधार पर उस मुकदमे से बरी हो चुका था।
कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि संबंधित अपराध किसी भी प्रकार के नैतिक पतन या जघन्य श्रेणी के अंतर्गत नहीं आते थे और नियोक्ता की यह कानूनी जिम्मेदारी थी कि वह यह साबित करे कि उम्मीदवार को चयन के वक्त उस मुकदमे की जानकारी थी, जिसे साबित करने में राज्य सरकार विफल रही और इसी आधार पर एकल पीठ के फैसले को पूरी तरह सही ठहराया गया।















