बालासोर, 10 सितंबर।
ओडिशा के बालासोर जिले के भोगराई इलाके में बादपाही के पास एक जंगल व कैसुरीना के बागान से आठ से नौ सितंबर के दौरान पांच दुर्लभ छोटे ओरंगउटान मिलने से हड़कंप मच गया है, जिन्हें स्थानीय लोग पहले सामान्य बंदर समझ रहे थे, लेकिन वन विभाग के अधिकारियों ने उनकी पहचान ओरंगउटान के रूप में की है। इन तीन नर और दो मादा शावकों की उम्र एक साल से भी कम बताई जा रही है, जो सबसे बड़ा रहस्य यह है कि ओरंगउटान भारत के मूल निवासी नहीं हैं और देश के जंगलों में कभी प्राकृतिक रूप से नहीं पाए जाते, क्योंकि उनका प्राकृतिक वास दक्षिण-पूर्वी एशिया के बोर्नियो और सुमात्रा में है जो ओडिशा से हजारों किलोमीटर दूर है।
फिलहाल इन पांचों ओरंगउटान का रेस्क्यू कर भुवनेश्वर के पास स्थित नंदनकानन जूलॉजिकल पार्क में शिफ्ट कर दिया गया है, जहां उन्हें क्वारंटीन सुविधा में रखकर पशुचिकित्सकों की देखरेख में विशेष भोजन और 24 घंटे निगरानी प्रदान की जा रही है, और अधिकारियों ने यह पता लगाने के लिए जांच शुरू कर दी है कि वे ओडिशा कैसे पहुंचे। इस मामले की गंभीरता को देखते हुए वाइल्डलाइफ क्राइम कंट्रोल ब्यूरो यानी डब्ल्यूसीसीबी को जांच सौंपी गई है, जिसमें अधिकारी सड़क, रेल, वायु और समुद्री मार्गों की जांच करने के साथ परिवहन बिंदुओं के सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं और इसके पीछे अंतरराष्ट्रीय वन्यजीव तस्करी रैकेट की आशंका पर भी विचार कर रहे हैं, हालांकि अभी इसकी पुष्टि नहीं हुई है।
यह मामला इसलिए भी बेहद संदेहास्पद बना हुआ है क्योंकि एक साथ पांच बहुत छोटे ओरंगउटान मिले हैं, और अधिकारियों का यह भी कहना है कि इंसानों के प्रति उनका शांत व्यवहार यह संकेत देता है कि वे पहले मानव संरक्षण में रह चुके हैं, जिससे इस बात को बल मिलता है कि उन्हें अवैध रूप से लाकर छोड़ा गया होगा न कि वे प्राकृतिक रूप से जंगल में पहुंचे। चूंकि अभी जांच जारी है इसलिए यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि उन्हें भारत कौन लाया, वे किस देश से आए थे या उन्हें आखिरकार कहां ले जाया जाना था।















