नई दिल्ली, 10 सितंबर।
उच्चतम न्यायालय के न्यायमूर्ति विक्रम नाथ की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने 1993 के चर्चित मुंबई सीरियल ब्लास्ट मामले में दोषी ठहराए गए अबू सलेम की समयपूर्व रिहाई की मांग को पूरी तरह से खारिज कर दिया है, जिसके बाद से उसकी जेल से बाहर आने की उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है।
सुनवाई के दौरान अबू सलेम के वकील ने यह तर्क दिया था कि जेल के अंदर उसके अच्छे आचरण और विचाराधीन कैदी के रूप में बिताए गए समय को कुल सजा में जोड़े जाने पर उसकी छब्बीस वर्ष की अवधि पूरी हो चुकी है, इसलिए उसे रिहा किया जाना चाहिए और टाडा कोर्ट ने भी इसका निर्देश दिया था जिसे जेल प्रशासन ने लागू नहीं किया।
इसके विपरीत, इससे पूर्व बॉम्बे उच्च न्यायालय ने भी अप्रैल 2025 में उसकी याचिका को यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि भारत सरकार द्वारा प्रत्यर्पण के वक्त पुर्तगाल को दिए गए आश्वासन के मुताबिक उसकी पच्चीस वर्ष की वास्तविक अवधि नवंबर 2030 में पूरी होगी और इस मियाद को अच्छे आचरण की छूट से कम नहीं किया जा सकता है।















