उज्जैन, 10 सितंबर।
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के सिलसिले में उज्जैन के कंठाल से छत्री चौक और सती गेट क्षेत्र के बीच चल रहे मार्ग चौड़ीकरण के दौरान बेसाल्ट पत्थर से निर्मित परमार कालीन आठ फीट ऊंची प्राचीन खड़े हनुमान प्रतिमा को हटाने की प्रक्रिया इन दिनों प्रशासनिक अमले के लिए कड़ी चुनौती बन गई है। पिछले छह दिनों से लगातार क्रेन और भारी-भरकम आधुनिक मशीनों के इस्तेमाल के बावजूद जब यह विशाल प्रतिमा अपनी जगह से एक इंच भी नहीं हिल सकी, तब स्थानीय नागरिकों और पुजारियों के विशेष अनुरोध पर प्रशासन ने अंततः आईआईटी इंदौर की विशेषज्ञ टीम को मैदान में उतारने का बड़ा निर्णय लिया।
मंदिर परिसर में लगातार उमड़ रही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ और इसे लेकर शहरभर में चल रही तरह-तरह की धार्मिक चर्चाओं के बीच, आईआईटी इंदौर की तकनीकी टीम ने आधुनिक उपकरणों के माध्यम से मूर्ति की जमीन के भीतर गहराई और आसपास की मिट्टी की स्थिति का बेहद बारीकी से अध्ययन कर लिया है। परमार वंश के समय की इस प्राचीन मूर्ति को इंटरलॉकिंग तकनीक से स्थापित किए जाने के कारण शुरुआती दौर में तमाम प्रशासनिक प्रयास पूरी तरह असफल साबित हुए, जिसके बाद प्रतिमा को बिना किसी क्षति के सुरक्षित हटाने के सभी प्रयास फिलहाल रोक दिए गए हैं।
अब जिला प्रशासन और नगर निगम ने स्पष्ट रूप से यह विश्वास दिलाया है कि उज्जैन की ऐतिहासिक धरोहर, जनता की आस्था और श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं का पूर्ण सम्मान करते हुए विशेषज्ञों की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही सर्वसम्मति से इस बात का निर्धारण किया जाएगा कि प्रतिमा को आगे किस तकनीक और तारीख पर अन्यत्र स्थानांतरित किया जाना है।















