काठमांडू, 10 सितंबर।
जलवायु परिवर्तन के गंभीर प्रभावों के चलते नेपाल के रसुवा क्षेत्र में हुई तबाही से उपजे नुकसान की भरपाई के लिए पड़ोसी देश ने संयुक्त राष्ट्र के हानि तथा नुकसान कोष से लगभग दो करोड़ अमेरिकी डॉलर यानी बीस मिलियन डॉलर की आर्थिक सहायता की औपचारिक मांग उठाई है।
संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन रूपरेखा के अंतर्गत गठित इस विशेष फंड के लिए भेजे गए इस आधिकारिक पत्र पर वित्त मंत्री डॉ. स्वर्णिम वाग्ले और पर्यावरण मंत्री गीता चौधरी के संयुक्त हस्ताक्षर हैं, और विदेश मंत्री शिशिर खनाल ने एक पॉडकास्ट साक्षात्कार के दौरान यह स्पष्ट किया है कि यह केवल एक प्रारंभिक मांग है क्योंकि आपदा के बाद हुए संपूर्ण नुकसान का विस्तृत आकलन करने के पश्चात वास्तविक स्थिति वैश्विक मंच पर रखी जाएगी।
विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों का मानना है कि चूंकि नेपाल ग्रीनहाउस गैसों का बहुत कम उत्सर्जन करने वाले देशों में शुमार है और जलवायु संतुलन में उसका योगदान महत्वपूर्ण है, इसलिए 26 अगस्त को रसुवा की भोटेकोशी नदी में आई भयंकर बाढ़ से हुए भारी जनधन के नुकसान को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय बोर्ड द्वारा इस सहायता राशि को स्वीकृत किए जाने में कोई तकनीकी अड़चन नहीं आनी चाहिए।















