भोपाल, 10 सितंबर।
भोपाल शहर को अब शिक्षा की नगरी कहा जाने लगा है। कोचिंग सेंटरों की भरमार है और हर साल हजारों छात्र अपने सपनों को पूरा करने के लिए यहां आते हैं, लेकिन इन छात्रों के रहने के लिए जो हॉस्टल बनाए गए हैं, उनकी हकीकत बेहद डरावनी है। आवासीय इलाकों में बिना अनुमति के चल रहे हॉस्टलों में छात्रों से न केवल मनमाना किराया वसूला जा रहा है, बल्कि उन्हें मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित भी किया जा रहा है। एक छोटे से कमरे में चार से पांच छात्रों को ठूंसना, बिजली-पानी के नाम पर अतिरिक्त वसूली और विरोध करने पर सामान बाहर फेंक देना आम बात हो गई है। दिल्ली में हुए हादसे के बाद यह सवाल और भी बड़ा हो गया है कि क्या भोपाल किसी बड़ी घटना का इंतजार कर रहा है।
शहर के एमपी नगर, रचना नगर और गौतम नगर जैसे इलाकों में हर तीसरे मकान पर हॉस्टल का बोर्ड लगा है, लेकिन इनमें से अधिकतर हॉस्टलों के पास नगर निगम की अनुमति तक नहीं है। आवासीय उपयोग के लिए बनी मल्टी और स्वतंत्र मकानों को हॉस्टल में बदल दिया गया है। एक ही मल्टी में आठ ऑफिस, तेरह परिवार और तीन अवैध हॉस्टल चल रहे हैं। न फायर सेफ्टी है, न सुरक्षा का कोई इंतजाम। छात्राएं तक ऐसे हॉस्टलों में असुरक्षित महसूस करती हैं। रात में अनजान लोगों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन शिकायत करने पर संचालक धमकी देता है।
ज्यादातर हॉस्टलों में कमरों का आकार दस बाई बारह फीट का है, लेकिन उसमें पांच-पांच छात्रों को रखा जा रहा है। पढ़ाई के लिए टेबल तक की जगह नहीं है। शोर-शराबा इतना रहता है कि पढ़ाई का माहौल ही नहीं बनता। दो महीने का एडवांस जमा कराया जाता है और यदि छात्र बीच में छोड़ना चाहे तो पैसा वापस नहीं किया जाता। कूलर चलाने के नाम पर तीन हजार रुपये तक अतिरिक्त मांगे जाते हैं और यदि छात्र विरोध करे तो दो दिन में कमरा खाली करने का फरमान सुना दिया जाता है। कई मामलों में तो ताला तोड़कर सामान बाहर फेंक दिया जाता है।
हॉस्टलों में खाने की गुणवत्ता बेहद खराब है। दाल में पानी, सब्जी में कीड़े और चावल में कंकड़ आम शिकायत है। सफाई के नाम पर महीने में एक बार झाड़ू लगाई जाती है। बाथरूम की हालत इतनी खराब है कि बीमार होने का खतरा हमेशा बना रहता है। छात्र बीमार होते हैं तो संचालक जिम्मेदारी लेने से बचता है। सुरक्षा के नाम पर कोई गार्ड नहीं है। सीसीटीवी कैमरे केवल दिखावे के लिए लगे हैं। महिला हॉस्टलों में भी पुरुष कर्मचारियों का बेरोकटोक आना-जाना लगा रहता है, जिससे छात्राओं में डर का माहौल रहता है।
छात्र शिकायत इसलिए नहीं करते, क्योंकि उन्हें डर रहता है कि उनकी पढ़ाई प्रभावित होगी। कई हॉस्टल संचालक छात्रों के [Aadhaar Redacted] और मूल प्रमाण पत्र जमा करा लेते हैं, ताकि वे विरोध न कर सकें। कोचिंग की तैयारी में व्यस्त छात्र इन पचड़ों से बचना चाहते हैं, इसलिए चुपचाप शोषण सहते रहते हैं। अभिभावक दूर होते हैं, इसलिए उन्हें असली हालत का पता ही नहीं चलता। जब तक कोई बड़ी घटना नहीं होती, तब तक यह काला कारोबार चलता रहता है।
हॉस्टल के पंजीयन को लेकर पुलिस कहती है कि यह नगर निगम देखेगा और जिला प्रशासन कहता है कि शिकायत आने पर कार्रवाई करेंगे। इस टालमटोल के कारण हॉस्टल माफिया बेलगाम हो गया है। शहर में कितने हॉस्टल हैं, कहां चल रहे हैं और किसके द्वारा चलाए जा रहे हैं, इसका कोई आंकड़ा किसी विभाग के पास नहीं है। न अग्निशमन विभाग की जांच होती है, न खाद्य विभाग की। इससे हादसे का खतरा बढ़ जाता है।
कुछ साल पहले दिल्ली के एक कोचिंग हब में आग लगने से कई छात्रों की जान गई थी। जांच में सामने आया था कि हॉस्टल में निकास का रास्ता तक नहीं था। भोपाल के हॉस्टलों की स्थिति भी कुछ वैसी ही है। अधिकतर हॉस्टल संकरी गलियों में हैं, जहां फायर ब्रिगेड की गाड़ी तक नहीं पहुंच सकती। एक छोटे से कमरे में पांच छात्र यदि फंस जाएं तो बाहर निकलना मुश्किल है। फिर भी प्रशासन नींद में है।
सभी हॉस्टलों का पंजीयन अनिवार्य किया जाना चाहिए और एकल खिड़की प्रणाली से अनुमति दी जानी चाहिए। फायर सेफ्टी, स्वच्छता और सुरक्षा के लिए स्पष्ट मानक तय किए जाएं। किराया नियंत्रण कानून लागू किया जाए, ताकि मनमानी वसूली रोकी जा सके। छात्रों के लिए हेल्पलाइन और शिकायत पोर्टल बनाया जाए। महिला हॉस्टलों में महिला स्टाफ और सुरक्षा गार्ड अनिवार्य किए जाएं। हॉस्टल संचालकों का पुलिस सत्यापन और भवन का फायर ऑडिट हर साल हो।
छात्र अपने घर से दूर सपनों को पूरा करने के लिए भोपाल आते हैं। उन्हें कैद नहीं, बल्कि पंख चाहिए। रहने की सुरक्षित जगह नहीं मिलेगी तो वे पढ़ाई कैसे करेंगे? हॉस्टल व्यवसाय बुरा नहीं है, लेकिन उसका नियमन जरूरी है। सरकार को चाहिए कि वह शिक्षा की नगरी को शोषण की नगरी बनने से रोके। यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो वह दिन दूर नहीं, जब भोपाल में भी दिल्ली जैसा हादसा हो जाएगा और तब पछताने के अलावा कुछ नहीं बचेगा। इसलिए जरूरी है कि प्रशासन जागे और हॉस्टल माफिया पर नकेल कसे।















