भोपाल, 10 सितंबर।
भोपाल में गणेश उत्सव की तैयारियों के बीच इस बार युवा पीढ़ी ने पंडालों को सिर्फ सजावट और धार्मिक प्रस्तुतियों तक सीमित नहीं रखने की तैयारी की है। जेन जी की झांकियों में गणेश भक्ति के साथ विज्ञान, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, पर्यावरण संरक्षण और साइबर सुरक्षा जैसे विषय दिखाई देंगे। यानी गणेशजी की आराधना के साथ बदलती दुनिया को समझने और समाज को जागरूक करने का प्रयास भी होगा। सोमवार, 14 सितंबर से शुरू हो रहे उत्सव को लेकर राजधानी में करीब चार हजार पंडाल आकार ले रहे हैं और हर पंडाल में जेन जी थीम की झलक साफ दिखाई दे रही है।
जेन जी यानी जनरेशन जेड, जो नई तकनीक और सोशल मीडिया में पली-बढ़ी है। इस पीढ़ी ने गणेश उत्सव को एक नए अंदाज में पेश करने का फैसला किया है। इनके पंडालों में केवल भक्ति नहीं, बल्कि संदेश भी होगा। एआई से बनी झांकियां, रोबोट द्वारा आरती और सेंसर से चलने वाले दृश्य इस बार आकर्षण का केंद्र होंगे। युवाओं का मानना है कि धर्म को यदि तकनीक से जोड़ा जाए तो वह और भी प्रभावशाली बन जाता है। इसलिए इस बार पंडालों में डिजिटल गणेश दरबार देखने को मिलेगा।
इस बार कई पंडालों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मशीन लर्निंग को थीम बनाया गया है। एआई के जरिए गणेशजी की पौराणिक कथाओं को इंटरैक्टिव तरीके से दिखाया जाएगा। भक्त अपने मोबाइल से क्यूआर कोड स्कैन करके गणेशजी की कथा सुन सकेंगे। कुछ पंडालों में वर्चुअल रियलिटी के जरिए कैलाश पर्वत के दर्शन कराए जाएंगे तो कहीं होलोग्राम से गणेशजी की मूर्ति हवा में तैरती नजर आएगी। साइबर सुरक्षा को लेकर भी जागरूकता फैलाई जाएगी। झांकियों में बताया जाएगा कि कैसे ऑनलाइन ठगी से बचा जाए।
हिंदू मित्र मंडल गणेश उत्सव समिति, भेल मछली में गणेशजी की मूर्ति के आसपास पानी, पेड़-पौधों से सजावट की गई है। समिति ने तय किया है कि इस बार थर्माकोल और प्लास्टिक का उपयोग नहीं किया जाएगा, बल्कि जीवित पौधों से पंडाल को सजाया जाएगा। उत्सव के बाद इन पौधों को भक्तों में बांटा जाएगा, ताकि वे अपने घरों में लगाएं। यह पहल पर्यावरण संरक्षण के लिए एक बड़ा संदेश है। अवधपुरी के सिद्धांत पैलेस में जेन जी ग्रुप ने भी पर्यावरण संरक्षण को केंद्र में रखा है। यहां ईको फ्रेंडली गणेश मूर्ति स्थापित की जाएगी।
ईको फ्रेंडली मूर्तियों का चलन इस बार और बढ़ गया है। मिट्टी से बनी मूर्तियों में बीज डाले जा रहे हैं, ताकि विसर्जन के बाद पौधा उग सके। कई समितियों ने प्राकृतिक रंगों से बनी मूर्तियां मंगवाई हैं। विसर्जन के लिए बड़े तालाब के बजाय कृत्रिम तालाबों का उपयोग किया जाएगा, ताकि जल प्रदूषण न हो। जेन जी ग्रुप का कहना है कि भक्ति के साथ प्रकृति की रक्षा भी जरूरी है। इसलिए हर पंडाल में जल संरक्षण और वृक्षारोपण का संदेश दिया जाएगा।
राजधानी में इस बार चार हजार से अधिक पंडाल आकार ले रहे हैं। हर गली-मोहल्ले में बप्पा के स्वागत की तैयारी चल रही है। छोटे पंडालों में स्थानीय कलाकारों द्वारा झांकियां बनाई जा रही हैं तो बड़े पंडालों में पेशेवर कलाकारों को बुलाया गया है। प्रशासन ने भी सुरक्षा और यातायात को लेकर तैयारी शुरू कर दी है। पंडालों में सीसीटीवी और अग्निशमन यंत्र लगाना अनिवार्य किया गया है। पुलिस ने भीड़ प्रबंधन के लिए विशेष योजना बनाई है।
जेन जी थीम में सोशल मीडिया का भी भरपूर उपयोग होगा। कई पंडालों में सेल्फी प्वाइंट बनाए जा रहे हैं, जहां एआई फिल्टर के जरिए भक्त गणेशजी के साथ फोटो ले सकेंगे। इंस्टाग्राम रील के लिए अलग लाइटिंग जोन बनाए गए हैं। युवा मंडल लाइव स्ट्रीमिंग के जरिए आरती का प्रसारण करेंगे, ताकि जो लोग पंडाल नहीं आ सके, वे घर बैठे दर्शन कर सकें। यह डिजिटल भक्ति का नया रूप है।
पुलिस और नगर निगम ने भी उत्सव को लेकर कमर कस ली है। सभी पंडालों को अनुमति लेना अनिवार्य किया गया है। बिजली विभाग ने अस्थायी कनेक्शन के लिए विशेष कैंप लगाए हैं। यातायात पुलिस ने भीड़ वाले इलाकों में रूट डायवर्ट करने की योजना बनाई है। विसर्जन के लिए कृत्रिम तालाब बनाए जा रहे हैं, ताकि यातायात और पर्यावरण दोनों का संतुलन बना रहे।
जेन जी थीम का सबसे बड़ा संदेश यही है कि भक्ति के साथ जिम्मेदारी भी जरूरी है। युवा चाहते हैं कि उत्सव केवल शोर-शराबे तक सीमित न रहे, बल्कि समाज को कुछ सिखाकर जाए। इसलिए हर पंडाल में कोई न कोई सामाजिक संदेश होगा। कहीं नशामुक्ति का तो कहीं सड़क सुरक्षा का, कहीं जल बचाने का तो कहीं डिजिटल ठगी से बचने का। यह उत्सव को और भी सार्थक बनाएगा।
इस बार का गणेश उत्सव भोपाल के लिए खास होगा, क्योंकि इसमें परंपरा और आधुनिकता का संगम देखने को मिलेगा। चार हजार पंडालों में गूंजने वाला बप्पा का जयकारा जब एआई की रोशनी, जेन जी की सोच और पौधों की हरियाली के साथ मिलेगा तो यह उत्सव यादगार बन जाएगा। युवा पीढ़ी ने साबित कर दिया है कि धर्म को समय के साथ बदलना चाहिए और तकनीक को भक्ति से जोड़कर ही समाज को नई दिशा दी जा सकती है।















