नई दिल्ली, 10 सितंबर।
उच्चतम न्यायालय ने तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी के निजी सहायक सुमित राय को जमीन हड़पने के एक बड़े मामले में बड़ा झटका देते हुए उनकी अग्रिम जमानत याचिका को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिसके बाद चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश में किसी भी प्रकार का फेरबदल करने से साफ इंकार कर दिया है।
मामले की सुनवाई के दौरान पश्चिम बंगाल सरकार की तरफ से पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि शालबनी भू-कब्जे के इस प्रकरण में आरोपी सुमित राय जांच में बिल्कुल भी सहयोग नहीं कर रहे हैं और पुलिस को उनसे कड़ाई से पूछताछ करने के लिए हिरासत की अत्यंत आवश्यकता है।
दूसरी तरफ सुमित राय के वकील ने दलील दी कि उनके मुक्किल जांच अधिकारियों के बुलावे पर ग्यारह बार पेश होकर लगभग अट्ठासी घंटे तक पूछताछ का सामना कर चुके हैं और संविधान प्रदत्त अधिकारों के तहत उन्हें चुप रहने का अधिकार है, किंतु अदालत ने कलकत्ता हाईकोर्ट के उस पुराने निर्णय को सही ठहराया जिसमें गिरफ्तारी पूर्व जमानत से मना कर दिया गया था क्योंकि यह पूरा मामला पश्चिम मेदिनीपुर जिले में करीब तीन सौ एकड़ सरकारी भूमि के कथित फर्जीवाड़े से जुड़ा हुआ है।















