चले थे जुगाड़ लगाने, लेकिन दांव उलटा पड़ गया। एक बड़े साहब ने कुछ जिम्मेदारी सौंपी और ताकीद किया कि बहुत गंभीर मामला है, लेकिन विभाग की कार्यप्रणाली के अनुसार साहब ने यही फरमान अपने जूनियर अधिकारी को सुना दिया और आगे बढ़ गए। गड़बड़ तो तब हो गई, जब दोनों छोटे-बड़े साहब एक ही दरबार में आमने-सामने आ गए।















