रांची, 11 सितंबर।
झारखंड उच्च न्यायालय में वर्ष दो हजार अट्ठारह से लापता गुमला की छह वर्षीय बच्ची से जुड़े बहुचर्चित मामले में शुक्रवार को सुनवाई हुई। अदालत के समक्ष राज्य सरकार ने जानकारी दी है कि मुख्य आरोपित भूखली लकड़ा का रिनपास में मनोवैज्ञानिक परीक्षण कराया जा चुका है। हालांकि, इस जांच की रिपोर्ट अभी तक हाथ नहीं लगी है।
सरकार की तरफ से अदालत से रिपोर्ट दाखिल करने के लिए एक सप्ताह का अतिरिक्त वक्त मांगा गया है। इस पर अदालत ने मामले की अगली सुनवाई के वास्ते अट्ठाइस सितंबर की तारीख तय की है। प्रार्थी की ओर से वकील शशांक शेखर ने अदालत में अपना पक्ष रखा है।
इससे पहले की सुनवाई में सरकार ने उच्च न्यायालय को बताया था कि स्वास्थ्य कारणों के चलते मुख्य आरोपित का गांधीनगर में नार्को टेस्ट नहीं हो पाया था। इसके बाद वहां उसका सस्पेक्ट डिटेक्शन टेस्ट समेत अन्य पूरक परीक्षण कराए गए थे, जिनकी रिपोर्ट भी अभी लंबित पड़ी हुई है।
अब अदालत को रिनपास में किए गए मनोवैज्ञानिक मूल्यांकन की रिपोर्ट का भी इंतजार है। अदालत ने सरकार को निर्देश देते हुए रिपोर्ट पेश करने के वास्ते समय प्रदान कर दिया है।
गौरतलब है कि गुमला की यह छह वर्षीय बच्ची सितंबर दो हजार अट्ठारह से रहस्यमय तरीके से गायब है। बच्ची की सकुशल बरामदगी के लिए उसकी मां चंद्रमुनि उराइन ने झारखंड उच्च न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण यानी हेवियस कॉर्पस याचिका दायर कर रखी है।















