नई टिहरी, 11 सितम्बर।
ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना के तहत टिहरी जिले में ढालवाला से नीर गड्डू के बीच बनाई जा रही 10 किलोमीटर लंबी सुरंग का शुक्रवार को सफलतापूर्वक ब्रेक थ्रू किया गया। सुरंग के दोनों छोर जुड़ने के साथ निर्माण कार्य का एक महत्वपूर्ण चरण पूरा हो गया है।
परियोजना अधिकारियों के अनुसार सुरंग का यह अहम काम निर्धारित तकनीकी मानकों, सुरक्षा प्रोटोकॉल और इंजीनियरिंग प्रक्रियाओं के अनुरूप पूरा किया गया। परियोजना प्रबंधक निशीथ शर्मा ने ढालवाला सुरंग के ब्रेक थ्रू को परियोजना की महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि निर्माण कार्य आवश्यक तकनीकी मानकों और सुरक्षा व्यवस्थाओं के साथ लगातार आगे बढ़ रहा है।
परियोजना को गति देने के लिए करीब एक हजार कर्मचारी 24 घंटे और महीने में 28 दिन काम कर रहे हैं। इससे हिमालयी क्षेत्र की कठिन परिस्थितियों के बीच इस महत्वाकांक्षी रेल परियोजना को पूरा करने के लिए किए जा रहे मानव संसाधन और तकनीकी प्रयासों का अंदाजा लगाया जा सकता है।
उप महाप्रबंधक सिविल ओपी मालगुड़ी ने कहा कि ऋषिकेश-कर्णप्रयाग रेल परियोजना महज रेल लाइन बिछाने की योजना नहीं है, बल्कि पर्वतीय उत्तराखंड के परिवहन ढांचे को नई दिशा देने वाली महत्वाकांक्षी परियोजना है। 125 किलोमीटर लंबी इस परियोजना में कुल 28 सुरंगें बनाई जानी हैं। इनमें से 22 सुरंगों का निर्माण रेल विकास निगम लिमिटेड द्वारा पूरा किया जा चुका है।
ऋषिकेश से कर्णप्रयाग तक रेल संपर्क विकसित होने से पर्वतीय क्षेत्रों में आवागमन और क्षेत्रीय संपर्क को नई गति मिलने की उम्मीद है। परियोजना के विभिन्न हिस्सों में सुरंगों सहित बड़े निर्माण कार्य जारी हैं। ढालवाला सुरंग का सफल ब्रेक थ्रू कठिन हिमालयी भूगोल के बीच निर्माण की बढ़ती गति को दर्शाता है।
परियोजना के वर्ष 2028 तक चमोली के कर्णप्रयाग तक पहुंचने की उम्मीद है। इससे चारधाम यात्रा और उत्तराखंड के विकास को नई गति मिलने की संभावना है। परियोजना के पूरा होने को पर्वतीय क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।















