पटना, 11 सितंबर।
बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी जनता दल यूनाइटेड का नाम बदलने की चर्चा तेज हो गई है। पार्टी के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष संजय झा ने जेडीयू का नाम बदलकर जनता दल नीतीश रखने का सुझाव दिया था। अब उपमुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव और ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने भी इस प्रस्ताव का समर्थन किया है।
बिजेंद्र यादव ने कहा कि पार्टी के सामने नाम बदलने का प्रस्ताव आने पर उस पर विचार किया जाएगा। वहीं श्रवण कुमार ने संजय झा के सुझाव को उचित बताते हुए कहा कि नीतीश कुमार पार्टी के सर्वमान्य नेता हैं और जेडीयू उनके नाम से ही जुड़ी हुई है।
श्रवण कुमार ने कहा कि नाम बदलने का प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि पार्टी का नाम जल्द से जल्द नीतीश कुमार के नाम पर किया जाना चाहिए। हालांकि, अंतिम निर्णय पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार को लेना है।
संजय झा ने एक दिन पहले खगड़िया में आयोजित कार्यक्रम में जेडीयू का नाम नीतीश कुमार के नाम पर रखने का सुझाव दिया था। उन्होंने कहा था कि नीतीश कुमार ने बिहार के विकास और पार्टी के उत्थान के लिए पूरी क्षमता से काम किया है, इसलिए उनके योगदान के सम्मान में पार्टी का नाम उनके नाम पर होना चाहिए।
पार्टी का नाम बदलने के लिए पहले राष्ट्रीय कार्यकारिणी में प्रस्ताव पारित करना होगा। इसके बाद सार्वजनिक सूचना जारी कर चुनाव आयोग को आवेदन देना होगा। आवेदन के साथ नाम परिवर्तन संबंधी प्रस्ताव, पार्टी संविधान में संशोधन और जरूरी पदाधिकारियों के समर्थन से जुड़े दस्तावेज देने होंगे। आयोग यह भी देखेगा कि नया नाम किसी मौजूदा राजनीतिक दल से मिलता-जुलता तो नहीं है।
जनता दल यूनाइटेड का गठन 30 अक्टूबर 2003 को समता पार्टी के जनता दल के शरद यादव गुट में विलय के बाद हुआ था। वर्ष 2005 में जेडीयू पहली बार बिहार की सत्ता में आई। इसके बाद करीब दो दशक तक नीतीश कुमार पार्टी के प्रमुख नेता के रूप में बिहार की राजनीति में प्रभावी रहे।















