नई दिल्ली, 15 सितंबर।
विश्व कप में पुरुष टीम के आठवें और महिला टीम के पांचवें स्थान पर रहने के बाद अब दोनों भारतीय हॉकी टीमें एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक के लक्ष्य के साथ मैदान में उतरने जा रही हैं। पुरुष वर्ग को खिताब का प्रबल दावेदार माना जा रहा है, और महिला टीम भी चीन को पीछे छोड़कर सोने का तमगा जीतने की उम्मीद संजोए हुए है। इन खेलों में स्वर्ण पदक हासिल करने से लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक का सीधा टिकट भी मिल जाएगा।
क्रेग फुल्टन के मार्गदर्शन में खेल रही भारतीय पुरुष टीम ने पिछले चार वर्षों से एशियाई हॉकी में अपना दबदबा कायम रखा है और इस दौरान उसने सभी महाद्वीपीय प्रतियोगिताएं अपने नाम की हैं। हालांकि 2006 के बाद से कोई भी टीम लगातार दो बार पुरुष हॉकी का स्वर्ण नहीं जीत पाई है, इसलिए यह सफर आसान नहीं होगा। विश्व कप की निराशा के बाद फुल्टन और वरिष्ठ खिलाड़ियों के लिए यह चुनौती काफी अहम है।
विश्व कप के दौरान अमित रोहिदास, जरमनप्रीत सिंह, सुमित, जुगराज सिंह, यशदीप सिवाच, संजय राणा और हरमनप्रीत सिंह जैसे रक्षापंक्ति के खिलाड़ियों का प्रदर्शन अपेक्षा के अनुरूप नहीं रहा था। भारत ने पूरे टूर्नामेंट में 19 गोल खाए जो पांचवां सबसे खराब रक्षात्मक रिकॉर्ड था। इसके बावजूद हरमनप्रीत की पेनल्टी कॉर्नर ड्रैगफ्लिक और अभिषेक नैन तथा मनप्रीत सिंह का फॉरवर्ड खेल सकारात्मक पहलू रहे हैं।
फुल्टन ने चारों क्वार्टर में एक जैसा प्रदर्शन न कर पाने पर चिंता जताई थी और ओलंपिक का सीधा टिकट दांव पर होने के कारण उन्होंने टीम में अनुभव को प्राथमिकता दी है। भारत को ग्रुप चरण में जापान और दक्षिण कोरिया जैसी टीमों से भिड़ना होगा जिसके बाद नॉकआउट में पाकिस्तान या मलेशिया से सामना हो सकता है।
महिला वर्ग में सजॉर्ड मारिजने के नेतृत्व वाली भारतीय टीम चीन के एशियाई वर्चस्व को समाप्त करने के इरादे से उतरेगी। विश्व कप में बेहतर पांचवें स्थान पर रहने से टीम का मनोबल ऊंचा है और युवा तथा अनुभवी खिलाड़ियों का संतुलन टीम में नई ऊर्जा भर रहा है। नवनीत कौर और दीपिका के अलावा गोलकीपर सविता पूनिया और बिचु देवी की भूमिका भी बेहद अहम होगी।
नेहा समेत अन्य खिलाड़ियों को पूरा विश्वास है कि महिला टीम इस बार 44 साल पुराना एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक का सूखा समाप्त कर देगी। कोच मारिज्ने का मानना भी है कि वर्तमान प्रतिभाओं का यह समूह उनके पहले कार्यकाल की टीम से भी अधिक दमदार है और विश्व कप के बाद अब एशियाई खेलों का स्वर्ण ही इस दावे को पुख्ता करेगा।













