21 सितंबर, नागौर।
मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) के इतिहास में भारत के लिए एक स्वर्णिम अध्याय जुड़ गया है। अइची-नागोया एशियाई खेलों में भारत की स्टार खिलाड़ी सुचिका तारियाल ने महिलाओं की पारंपरिक -60 किग्रा स्पर्धा में कांस्य पदक अपने नाम करते हुए महाद्वीपीय खेलों में देश के लिए एमएमए का पहला ऐतिहासिक मेडल जीत लिया है। हालांकि वह फाइनल में पहुंचने से बेहद करीब से चूक गईं, लेकिन इस ऐतिहासिक पोडियम फिनिश ने भारतीय कॉम्बैट स्पोर्ट्स में एक नया मील का पत्थर स्थापित कर दिया है।
सेमीफाइनल मुकाबले में सुचिका का सामना सिंगापुर की मजबूत खिलाड़ी हुई हुन टियो से हुआ, जहाँ बेहद कड़े संघर्ष और अतिरिक्त समय (ओवरटाइम) तक चले मुकाबले में उन्हें मामूली अंतर से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के बाद वह खिताबी मुकाबले की दौड़ से तो बाहर हो गईं, लेकिन उन्होंने कांस्य पदक जीतकर देश का मस्तक गर्व से ऊंचा कर दिया। इससे पहले रविवार को खेले गए क्वार्टरफाइनल मुकाबले में सुचिका ने मंगोलिया की अल्तंचिमेग बैगालमाआ को 2-0 से शिकस्त देकर सेमीफाइनल में अपनी जगह पक्की की थी।
36 वर्षीय सुचिका तारियाल का कॉम्बैट स्पोर्ट्स का सफर बेहद प्रेरणादायक रहा है। इससे पहले वह जूडो में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी छाप छोड़ चुकी हैं और 2022 के बर्मिंघम राष्ट्रमंडल खेलों के कांस्य पदक मुकाबले तक का सफर तय किया था। इसके अलावा उन्होंने 2023 के एशियाई खेलों में कुराश स्पर्धा में भी भारत का प्रतिनिधित्व किया था। जूडो और जिउ-जित्सु (2024 में विश्व खिताब विजेता) में लंबी सफलता के बाद उन्होंने एमएमए में वापसी की और साल 2024 के अंत में एक बहु-मुकाबला अनुबंध पर हस्ताक्षर किए। घुटने की चोट जैसी तमाम बाधाओं को पार करते हुए उनकी यह ऐतिहासिक उपलब्धि भारतीय खेल जगत के लिए एक बड़ी सफलता है।













