नई दिल्ली, 25 सितंबर।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘सेवा संकल्प अभियान’ के सेवा यात्रियों से कहा कि अलग-अलग राज्यों के गांवों में जाकर लोगों से जुड़ने और सेवा कार्य करने के अनुभव जीवनभर की अमूल्य पूंजी बनेंगे। उन्होंने युवाओं से कहा कि भारत की विविधता, ग्रामीण संस्कृति और सेवा भावना को केवल किताबों के माध्यम से पूरी तरह समझना संभव नहीं है।
वडनगर से वाराणसी जा रहे सेवा यात्रियों के दल से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बातचीत में मोदी ने कहा कि पिछले 10-12 वर्षों में गांवों में बुनियादी सुविधाओं और ढांचे में बड़ा बदलाव आया है। शहर और गांव के बीच का अंतर भी कम हुआ है।
उन्होंने नमो ड्रोन दीदी और लखपति दीदी जैसी योजनाओं का उल्लेख करते हुए यात्रियों से ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहे बदलावों को देखने और लोगों से सीधे संवाद करने को कहा। उन्होंने यात्रियों से यात्रा के दौरान अपने अनुभव लिखने और उन्हें दर्ज करने का भी आग्रह किया।
प्रधानमंत्री ने यात्रियों को सुरक्षा के प्रति सजग रहने की सलाह दी। भगवा साफे के संदर्भ में उन्होंने हल्के अंदाज में कहा कि बाइक चलाते समय हेलमेट जरूर पहनें और साफे को हेलमेट न समझें।
उन्होंने यात्रियों से परिवार के संपर्क में रहने तथा जिन क्षेत्रों से वे गुजरें, वहां के लोगों से जुड़ने का सुझाव दिया। लोगों के संपर्क नंबर लेने और उनके साथ वाट्सऐप समूह बनाने की बात भी कही।
पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती पर उन्हें याद करते हुए मोदी ने सेवा से जुड़े सात सूत्रों सेवा भाव, संतुलन, संयम, समन्वय, सकारात्मकता, संवेदना और संवाद का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि यही सेवा संकल्प यात्रा की मूल भावना है।
मोदी ने कहा कि गांवों में बच्चों को पढ़ाई की सामग्री देना, पौधारोपण, वृद्धजनों की सेवा, महिलाओं से संपर्क और युवाओं के सपनों को समझना अलग-अलग कार्य हैं, लेकिन इन सभी के पीछे समाज सेवा और मानवता को केंद्र में रखने की भावना है।
महात्मा गांधी का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उन्होंने स्वतंत्रता आंदोलन के साथ सामाजिक सुधार के लिए भी काम किया। समाज में सकारात्मक बदलाव के लिए लगातार प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने सफाईकर्मियों के योगदान का उल्लेख करते हुए उनके सम्मान की बात कही और प्रयागराज में सफाईकर्मियों के पैर धोकर सम्मान करने की घटना का जिक्र किया।
उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि व्यक्ति का विकास समाज और देश से अलग नहीं हो सकता। समाज की प्रगति प्रकृति को नुकसान पहुंचाकर नहीं होनी चाहिए और विकास का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना चाहिए।
प्रधानमंत्री ने कहा कि बड़े लक्ष्य छोटे-छोटे प्रयासों से हासिल होते हैं। उन्होंने यात्रियों से यात्रा के अनुभव लिखने और रिकॉर्ड करने को कहा। उन्होंने बताया कि अभी प्रत्येक टोली में करीब 20 लोग हैं, लेकिन वडनगर और काशी पहुंचने पर दोनों ओर करीब 500-500 लोग होंगे।
उन्होंने यात्रियों को सुझाव दिया कि दोनों स्थानों पर दो-तीन घंटे साथ बैठकर यात्रा के अनुभव साझा करें। सेवा संकल्प यात्रा 10 राज्यों के 193 जिलों, 773 तहसीलों और 10,159 गांवों से होकर गुजर रही है।
यात्रा के दौरान पौधारोपण, स्वच्छता, फल वितरण, चिकित्सा सहायता, किट वितरण और अंगदान के संकल्प सहित करीब 25 तरह के सेवा कार्य किए जा रहे हैं। 25 सितंबर तक 20 टोलियां 13,733 किलोमीटर की दूरी तय कर चुकी थीं, वहीं वाराणसी से वडनगर जाने वाली टोलियां 5,961 किलोमीटर की यात्रा पूरी कर चुकी थीं।
मोदी ने सेवा संकल्प यात्रा की तुलना नदी से करते हुए कहा कि नदी भाषा, परिवार या आर्थिक स्थिति के आधार पर भेद नहीं करती और सभी को नवजीवन देती है। उन्होंने कहा कि इसी तरह यह यात्रा लोगों को जोड़ते हुए जनकल्याण से जगकल्याण की भावना को आगे बढ़ा रही है।












