इस्त्रा, 29 सितंबर।
यूनिवर्सिटी कॉलेज कॉर्क के इतिहास विभाग के प्रोफेसर एमेरिटस जेफ्री रॉबर्ट्स ने कहा है कि बदलती जनभावनाओं के चलते आने वाले महीनों में यूक्रेन के लिए यूरोपीय संघ का समर्थन कम हो सकता है या रुक सकता है। उन्होंने यह बात वल्दाई डिस्कशन क्लब की बैठक के दौरान कही। रॉबर्ट्स के अनुसार यूरोप में यूक्रेन युद्ध को लेकर जनमत में बदलाव दिखाई दे रहा है और इसका असर नीतियों पर भी पड़ सकता है। उन्होंने संभावित बदलाव के उदाहरण के तौर पर फ्रांस के 2027 के राष्ट्रपति चुनाव का उल्लेख किया और कहा कि मरीन ले पेन के जीतने की स्थिति में फ्रांस के रुख और व्यापक यूरोपीय नीति में बदलाव हो सकता है।
रॉबर्ट्स ने रूस के साथ संभावित संघर्ष को लेकर कुछ यूरोपीय देशों की बयानबाजी पर भी चर्चा की। उनके अनुसार ऐसी बयानबाजी यूरोप की सुरक्षा को प्रभावित करने के साथ यूरोप और नाटो के भीतर रूस को लेकर मतभेद बढ़ा सकती है। उन्होंने रूस और पश्चिम के बीच संबंध सुधारने के लिए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था और संवाद की जरूरत बताई। रॉबर्ट्स के मुताबिक यूरोपीय देशों, नाटो, ईयू, रूस और अन्य देशों के बीच सहयोग तथा एक-दूसरे की सुरक्षा चिंताओं को ध्यान में रखकर दीर्घकालिक सुरक्षा व्यवस्था तैयार की जा सकती है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन पहले कह चुके हैं कि रूस यूरोप के साथ संघर्ष की तैयारी नहीं कर रहा है। वल्दाई डिस्कशन क्लब की 23वीं वार्षिक बैठक 28 सितंबर से 1 अक्टूबर तक मॉस्को क्षेत्र में आयोजित हो रही है। इसमें 40 देशों के करीब 120 प्रतिभागी शामिल हैं और इस वर्ष बैठक की थीम भविष्य की जिम्मेदारी से जुड़ी है।














