काठमांडू, 30 सितंबर।
नेपाल के पूर्व प्रधान न्यायाधीश चोलेन्द्रशमशेर राणा को आधी रात कथित तौर पर गैरकानूनी तरीके से हिरासत में लिए जाने के मामले ने संसद में तूल पकड़ लिया। विपक्षी सांसदों ने सरकार से इस कार्रवाई पर स्पष्ट जवाब मांगा और राणा की हिरासत को कानून के शासन के खिलाफ बताया। इस मुद्दे पर सत्तापक्ष के सांसदों ने कोई प्रतिक्रिया नहीं दी।
नेपाली कांग्रेस, एमाले, नेकपा, श्रम संस्कृति पार्टी और राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के सांसदों ने राणा की गिरफ्तारी पर आपत्ति जताई। उनका आरोप है कि ‘जेन-जी’ के नाम का इस्तेमाल कर संविधान और कानून का उल्लंघन करते हुए पूर्व प्रधान न्यायाधीश को हिरासत में लिया गया।
नेपाली कांग्रेस के सांसद आनन्द प्रसाद ढुंगाना ने सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि मौजूदा शासन व्यवस्था पंचायती दौर से भी अधिक निरंकुश नजर आ रही है। उन्होंने सवाल किया कि पूर्व प्रधान न्यायाधीश को रात में बिना वारंट क्यों पकड़ा गया और उन्हें हिरासत में लेने की जरूरत क्यों पड़ी।
ढुंगाना ने सरकार पर कानून के बजाय मौखिक आदेशों के आधार पर शासन चलाने का आरोप लगाया। उन्होंने मांग की कि सरकार यह स्पष्ट करे कि राणा को आखिर किस वजह से हिरासत में लिया गया था।
उन्होंने कहा कि यदि राणा की सुरक्षा को लेकर खतरा था तो उनकी सुरक्षा बढ़ाई जानी चाहिए थी, गिरफ्तारी क्यों की गई। ढुंगाना ने कहा कि पहले भी ‘जेन-जी’ के नाम पर सिंहदरबार, सर्वोच्च अदालत, संसद और राष्ट्रपति भवन में आगजनी की घटनाएं हुई थीं और अब इसी नाम पर असुरक्षा का हवाला देकर पूर्व प्रधान न्यायाधीश को हिरासत में लिया गया।
विपक्षी सांसदों ने सरकार से यह भी पूछा कि राणा को पुलिस ने किस कारण हिरासत में लिया और बाद में उन्हें रिहा क्यों किया गया। विपक्षी दलों ने उनकी हिरासत को लेकर सरकार की ओर से बताए गए कारणों पर भी सवाल उठाए हैं।














