काठमांडू, 30 सितंबर।
नेपाल में लगातार तीन दिनों से हो रही बारिश और प्राकृतिक आपदाओं ने चीन के साथ होने वाले जमीनी व्यापार को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। नेपाल-चीन व्यापार के तीनों प्रमुख उत्तरी सीमा नाके बंद होने से माल की आवाजाही रुक गई है। त्योहारों में करीब दो सप्ताह का समय बचा है, ऐसे में बाजार में सामान की आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है।
तातोपानी-खासा, रसुवागढ़ी और कोराला सीमा नाके फिलहाल बंद हैं। इन सीमावर्ती क्षेत्रों तक पहुंचने वाली सड़कों और बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान हुआ है। इसके कारण बड़े स्तर पर मालवाहक वाहनों का संचालन संभव नहीं हो पा रहा है।
सीमा शुल्क विभाग के आंकड़ों के अनुसार, चालू वित्त वर्ष के शुरुआती दो महीनों में नेपाल चीन से 76.40 अरब नेपाली रुपये से अधिक का सामान आयात कर चुका है। ऐसे में तीनों प्रमुख व्यापारिक मार्गों के बाधित होने से व्यापार पर व्यापक असर पड़ा है।
पहले दो सीमा नाके हुए बंदभूस्खलन के खतरे के कारण चीन ने सबसे पहले तातोपानी-खासा सीमा नाका बंद किया था। इसके बाद 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में आई बाढ़ से रसुवागढ़ी नाका भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया।
दो प्रमुख मार्ग बंद होने के बाद मुस्तांग का कोराला नाका वैकल्पिक व्यापारिक रास्ता बना था। अब कालीगंडकी नदी की बाढ़ ने कोराला तक जाने वाला सड़क मार्ग भी काट दिया है। कालीगंडकी गलियारे और मध्यपहाड़ी राजमार्ग पर कई पुलों के पहुंच मार्ग बाढ़ में बह गए हैं।
कोराला सीमा नाका और सीमा शुल्क कार्यालय सुरक्षित हैं, लेकिन बेनी-जॉमसोम सड़क पर पुलों को हुए नुकसान से मालवाहक वाहनों की आवाजाही बंद है।
15 दिन में पहुंचे 434 कंटेनर और 641 इलेक्ट्रिक वाहनतातोपानी और रसुवागढ़ी बंद होने के बाद कोराला नाके पर व्यापार का दबाव बढ़ गया था। 10 से 25 सितंबर के बीच केवल 15 दिनों में 434 कंटेनर और 641 इलेक्ट्रिक वाहन कोराला के रास्ते नेपाल पहुंचे।
भाद्र के अंतिम सप्ताह तक मुस्तांग सीमा शुल्क कार्यालय चालू वित्त वर्ष में 2.31 अरब नेपाली रुपये से अधिक राजस्व जुटा चुका था। पिछले वित्त वर्ष में कोराला मार्ग से 14.41 अरब नेपाली रुपये के सामान और 3,000 से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन नेपाल पहुंचे थे। सड़क संपर्क टूटने के बाद अब अरबों रुपये का व्यापार अटक गया है।
त्योहारों के सामान की आपूर्ति पर असरसीमा नाके बंद होने से चीन से आने वाले कपड़े, जूते-चप्पल, बैग, इलेक्ट्रॉनिक सामान और इलेक्ट्रिक वाहनों की आपूर्ति रुक गई है। इससे व्यापारियों के साथ उपभोक्ताओं की चिंता भी बढ़ी है।
आरबी कॉम्प्लेक्स बिजनेस एसोसिएशन के अध्यक्ष परशुराम दाहाल के अनुसार, त्योहार के लिए मंगाए गए सामान में केवल 20 से 30 प्रतिशत माल ही अब तक काठमांडू पहुंच पाया है। बाकी सामान रास्तों में फंसा हुआ है। कोराला मार्ग से गोदामों का माल लाने का प्रयास किया गया, लेकिन अब यह रास्ता भी बंद हो गया है।
दाहाल ने बताया कि परेशानी केवल सीमा शुल्क तक सीमित नहीं है। अमेरिकी डॉलर की बढ़ती विनिमय दर और परिवहन लागत में वृद्धि भी सामान की कीमतों को प्रभावित कर रही है। सड़कों के बंद होने से परिवहन खर्च बढ़ा है और आने वाले सामान की कीमत 25 से 30 प्रतिशत तक बढ़ने की आशंका है।
भारत के रास्ते छोटे वाहनों से सामान लाने की कोशिशबड़े मालवाहक ट्रकों की आवाजाही प्रभावित होने के बाद कुछ व्यापारी भारत के रास्ते छोटे वाहनों से सामान मंगाने लगे हैं। हालांकि, दाहाल के अनुसार भारतीय सामान चीनी सामान से महंगा है और छोटे वाहनों से परिवहन का खर्च भी अधिक पड़ रहा है।
मौजूदा भंडार और स्थानीय उत्पादन से बाजार को कुछ राहत मिल रही है। हालांकि, सड़कों के क्षतिग्रस्त होने के कारण काठमांडू के बाहर के थोक व्यापारी राजधानी पहुंचकर सामान नहीं ले पा रहे हैं।
कुछ व्यापारी व्हाट्सऐप और सामाजिक माध्यमों से ऑर्डर ले रहे हैं, लेकिन कारोबार की गति धीमी है। दाहाल ने कहा कि सितंबर में बारिश के कारण लगातार तीन वर्षों से सड़कें क्षतिग्रस्त हो रही हैं और व्यापार प्रभावित हो रहा है। इस बार भी प्राकृतिक आपदा का सबसे अधिक असर व्यापारियों पर पड़ा है।














