काठमांडू, 05 अक्टूबर।
काठमांडू में चर्च की आर्थिक सहायता से संचालित ‘भ्रूणका आवाजहरू’ संस्था को लेकर जांच में गंभीर आरोप सामने आए हैं। आरोप है कि 18 से 22 वर्ष की गर्भवती युवतियों को संस्था के आश्रय गृह में रखा जाता था और प्रसव के बाद उनके नवजात बच्चों को निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के बिना दूसरे परिवारों को धर्मपुत्र या धर्मपुत्री के रूप में सौंप दिया जाता था। गोदावरी नगरपालिका ने 15 अप्रैल 2026 को संस्था का अनुगमन किया था, जिसमें बच्चों के हस्तांतरण में कानूनी प्रावधानों का पालन नहीं किए जाने की बात दर्ज की गई। जांच के अनुसार अब तक 27 गर्भवती किशोरियां और युवतियां संस्था में रह चुकी हैं। इनमें यौन हिंसा के कारण गर्भवती हुई युवतियां भी शामिल थीं। आरोप है कि ऐसे मामलों में पुलिस को सूचना देने और आरोपियों पर कार्रवाई कराने के बजाय घटनाओं को गोपनीय रखा गया। प्रसव के बाद मां और नवजात को अलग कर दिया जाता था तथा कुछ समय बाद युवती संस्था से बाहर चली जाती थी। संस्था वर्ष 2009 में पंजीकृत हुई थी और इसे विदेशी सहायता तथा नेपाली चर्च समाज से सहयोग मिलने की बात सामने आई है।
संस्था की अध्यक्ष सुजन कुंवर ने कहा कि इसका उद्देश्य गर्भपात को हतोत्साहित करना और महिलाओं को बच्चे को जन्म देने के लिए प्रोत्साहित करना है। उन्होंने बच्चों को दूसरे परिवारों को सौंपे जाने की बात स्वीकार की, लेकिन इसके लिए तय कानूनी प्रक्रिया अपनाए जाने का उल्लेख नहीं किया। उनके अनुसार बच्चों को पहले युवती के अभिभावकों को और फिर उनके माध्यम से अन्य लोगों को सौंपने की व्यवस्था थी, जिसके बाद जन्म पंजीकरण नए परिवार के नाम से किया जाता था। संस्था के पदाधिकारियों के बयानों में यह भी सामने आया कि नवजात को जन्म के 7 से 10 दिन के भीतर मां से अलग कर दिया जाता था और बच्चे को वापस लेने के बाद उसकी निगरानी नहीं की गई। संस्था के निदेशक सोनाम राई और सह सचिव विमला खत्री ने भी बच्चों को सौंपने की कानूनी प्रक्रिया की जानकारी नहीं होने की बात कही। संस्था का दावा है कि बच्चों को नेपाल के भीतर ही परिवारों को दिया गया और उनका रिकॉर्ड रखा गया, लेकिन उनकी वर्तमान स्थिति की निगरानी नहीं की गई। जांच में यह भी सामने आया कि बच्चों को लेने वाले कई लोग संस्था के पदाधिकारियों के परिचित या बिचौलियों के संपर्क से पहुंचे थे, जिससे संस्था की गतिविधियों और बच्चों के हस्तांतरण की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हुए हैं।














