भोपाल, 06 अक्टूबर।
मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल में मेट्रो रेल परियोजना के ऑरेंज लाइन फेज-2 के तहत प्रस्तावित अंडरग्राउंड रूट को लेकर शाही कब्रिस्तान की भूमि का विवाद एक बार फिर तूल पकड़ गया है। सोमवार देर रात भोपाल टॉकीज के निकट स्थित शाही कब्रिस्तान परिसर में मेट्रो निर्माण दल और पुलिस बैरिकेडिंग व कार्य तैयारियों के साथ पहुंची, जिसकी भनक लगते ही कांग्रेस विधायक आतिफ अकील अपने समर्थकों और स्थानीय नागरिकों के साथ मौके पर जा पहुंचे और चल रहे कार्यों पर कड़ा विरोध जताया। इस दौरान स्थल पर विधायक की पुलिस तथा मेट्रो अधिकारियों के साथ तीखी बहस हुई और उन्होंने अधिकारियों को सख्त लहजे में हिदायत दी कि कब्रिस्तान की इस संवेदनशील संपत्ति पर बिना किसी वैधानिक अनुमति के कोई भी गतिविधि या निर्माण कार्य नहीं होना चाहिए। विधायक ने अपने पूर्वजों की कब्रों का हवाला देते हुए मेट्रो टीम को तत्काल मशीनरी और निर्माण सामग्री वहां से हटाने के निर्देश दिए तथा दोटूक शब्दों में कहा कि शाही औकाफ से विधिवत अनुमति प्राप्त किए बिना यहां एक इंच भी काम आगे नहीं बढ़ाया जा सकता, क्योंकि यह मामला पहले से ही मध्य प्रदेश राज्य वक्फ अधिकरण में विचाराधीन है।
गौरतलब है कि भोपाल मेट्रो के ऑरेंज लाइन फेज-2 प्रोजेक्ट के तहत सुभाषनगर से करोंद तक लगभग 9.74 किलोमीटर लंबे कॉरिडोर का निर्माण प्रस्तावित है, जिसमें 5.38 किमी हिस्सा एलिवेटेड और 3.39 किमी हिस्सा अंडरग्राउंड रखा गया है। इस एलिवेटेड हिस्से में पुल बोगदा, ऐशबाग, सिंधी कॉलोनी, डीआईजी बंगला, कृषि उपज मंडी और करोंद चौराहा जैसे छह प्रमुख स्टेशनों के निर्माण पर लगभग 650 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जबकि करीब 890 करोड़ रुपये की लागत वाले अंडरग्राउंड रूट में भोपाल रेलवे स्टेशन और नादरा बस स्टैंड को शामिल किया गया है। इसी अंडरग्राउंड सुरंग और रूट के शाही कब्रिस्तान के भूभाग के नीचे से गुजरने को लेकर स्थानीय स्तर पर लगातार आपत्तियां दर्ज कराई जा रही हैं, और चूंकि यह पूरा विवाद और भूमि का मसला वर्तमान में कानूनी प्रक्रिया व वक्फ अधिकरण की सुनवाई के दायरे में है, इसलिए इस ताजा विरोध-प्रदर्शन ने प्रशासनिक और मेट्रो प्रबंधन की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।














