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संपादकीय
26 Oct, 2026

दस्तावेज जुटाने की प्रक्रिया होगी आसान, जांच में तेजी, थाना प्रभारियों को मिला लिखित समन जारी करने का अधिकार

मध्यप्रदेश पुलिस अब भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता की धारा 94 के तहत जांच के लिए जरूरी दस्तावेज और वस्तुएं लिखित समन के जरिए मंगवा सकेगी, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता और जांच की गति बढ़ने की उम्मीद है।

भोपाल, 26 अक्टूबर।

मध्यप्रदेश पुलिस में एक बड़ा बदलाव किया गया है। अब किसी भी अपराध की जांच के दौरान पुलिस को कोई दस्तावेज या अन्य वस्तु चाहिए, तो थाने का प्रभारी अधिकारी संबंधित व्यक्ति को लिखित समन भेजकर उसे जांच के लिए मंगवा सकता है। इसके लिए पहले पीएचक्यू की सीआईडी विंग ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) की धारा 94 का हवाला देते हुए थानों के अधिकारियों को इस नियम का पालन करने को कहा है। इससे पहले किसी भी मामले की छानबीन के लिए या तो थाने का स्टाफ जाकर सबूत इकट्ठा करता था या इसके लिए अदालत के आदेश लेने पड़ते थे। अब थाना प्रभारी को यह अधिकार होगा कि वह किसी भी व्यक्ति या अभियुक्त को समन जारी कर संबंधित सबूत पेश करने के लिए कह सके, बशर्ते वे संबंधित अपराध की जांच के लिए जरूरी हों।

यह बदलाव छोटा लगता है, लेकिन इसका असर बहुत बड़ा हो सकता है। पहले की व्यवस्था में थानों में लंबी कानूनी प्रक्रिया से निजात नहीं मिल पा रही थी। पुलिस को कई बार मामले से संबंधित दस्तावेजों की जरूरत होती थी, जैसे बैंक स्टेटमेंट, मोबाइल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज और संपत्ति के कागजात, लेकिन इसके लिए पुलिस को अदालत के चक्कर लगाने पड़ते थे।

नए कानून में यह प्रावधान किया गया है कि अब थाने का अधिकारी संबंधित व्यक्ति को लिखित समन भेजेगा, जिसमें स्पष्ट लिखा होगा कि किस थाने में कौन-सा अपराध दर्ज है, किन दस्तावेजों की जरूरत है और उन्हें कब तथा कहां पेश करना है। यदि व्यक्ति स्वयं उपस्थित नहीं होना चाहता, तो वह दस्तावेज डाक या अन्य माध्यमों से भी भेज सकता है।

मध्यप्रदेश में नए कानून को सख्ती से लागू करने के आदेश दे दिए गए हैं। अब हर छोटे-बड़े मामले में अदालत के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे और न ही अधीनस्थों को मौखिक आदेश दिए जाएंगे। सब कुछ लिखित में और निर्धारित प्रारूप में होगा।

मुख्यालय ने सभी थानों को भेजा प्रारूप

मुख्यालय ने समन के लिए बाकायदा प्रारूप तय करते हुए सभी थानों को भेज दिया है। इसमें थाने का नाम, अपराध क्रमांक, धाराएं और जिन दस्तावेजों की जरूरत है, उनकी सूची भरकर संबंधित व्यक्ति को भेजी जाएगी। भोपाल और इंदौर के पुलिस आयुक्तों, प्रदेश के सभी पुलिस अधीक्षकों तथा एसटीएफ, साइबर सेल और अपराध अनुसंधान विभाग की इकाइयों को भेजे गए निर्देशों में स्पष्ट कर दिया गया है कि नए कानूनों को सही तरीके से लागू करते हुए लंबित मामलों की तेजी से जांच की जाए। इससे पहले पुलिस जांच के दौरान किसी मामले से जुड़े दस्तावेज या सामान मंगवाने के लिए मौखिक आदेशों या अपने स्तर पर तैयार की गई पर्चियों का इस्तेमाल किया जाता था। इससे कई बार असमंजस की स्थिति बन जाती थी और जरूरी सबूत समय पर नहीं मिल पाते थे।

नए नियमों के मुताबिक, यदि किसी थाने के प्रभारी अधिकारी को जांच के सिलसिले में किसी व्यक्ति से दस्तावेज या जरूरी वस्तु मंगवानी है, तो उन्हें निर्धारित कानूनी प्रक्रिया का पालन करना होगा। इससे लंबी कानूनी प्रक्रिया से निजात मिलेगी। अब तक पुलिस को मामले से संबंधित बैंक स्टेटमेंट, मोबाइल रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, संपत्ति के कागजात या अन्य जरूरी सबूत फरियादी अथवा अभियुक्त से प्राप्त करने के लिए कई बार लंबी प्रक्रिया अपनानी पड़ती थी। दस्तावेज मंगवाने के लिए अदालत का सहारा लेना पड़ता था, जिसमें काफी समय लग जाता था। नए प्रावधान के तहत थाने का अधिकारी संबंधित व्यक्ति को लिखित समन भेज सकेगा, जिसमें अपराध, आवश्यक दस्तावेजों और उन्हें पेश करने के स्थान का स्पष्ट उल्लेख होगा। यदि व्यक्ति स्वयं उपस्थित नहीं होना चाहता, तो वह दस्तावेज डाक या अन्य माध्यमों से भी भेज सकता है।

इस बदलाव का सीधा असर आम आदमी पर भी पड़ेगा। पहले जब किसी के साथ ठगी, धोखाधड़ी या साइबर अपराध होता था, तो उसे खुद ही बैंक के चक्कर लगाने पड़ते थे। कई बार पुलिस को जरूरी रिकॉर्ड हासिल करने में भी समय लगता था। अब पुलिस संबंधित बैंक या अन्य संस्थान को समन भेजकर रिकॉर्ड मंगवा सकेगी, जिससे पीड़ित को राहत मिलेगी और जांच में तेजी आएगी।

पुलिस की मनमानी पर भी रोक लगाने में यह व्यवस्था मददगार हो सकती है। पहले मौखिक आदेश पर किसी को भी थाने बुला लिया जाता था और उससे दस्तावेज मांग लिए जाते थे। अब सब कुछ लिखित में होगा, इसलिए संबंधित व्यक्ति को स्पष्ट जानकारी रहेगी कि उसे किस मामले में और कौन-से दस्तावेज प्रस्तुत करने हैं।

इस नए अधिकार के साथ ही दुरुपयोग रोकने के लिए भी निर्देश दिए गए हैं। मुख्यालय ने स्पष्ट किया है कि समन केवल उसी स्थिति में जारी किया जाए, जब उसकी वास्तव में जरूरत हो और मांगे गए दस्तावेजों या वस्तुओं का अपराध की जांच से सीधा संबंध हो। बेवजह किसी को परेशान करने या असंबंधित निजी दस्तावेज मांगने की अनुमति नहीं होगी। हर समन का रिकॉर्ड थाने में रखा जाएगा और वरिष्ठ अधिकारी उसकी समीक्षा करेंगे। यदि कोई थाना प्रभारी इस अधिकार का गलत इस्तेमाल करता है, तो उसके खिलाफ कार्रवाई भी की जा सकेगी।

न्याय प्रणाली पर पड़ेगा सकारात्मक असर

अदालतों में पहले से ही लाखों मामले लंबित हैं। उनमें से कई मामले केवल इसलिए अटके रहते हैं, क्योंकि जांच में जरूरी दस्तावेज समय पर नहीं मिल पाते। अब जब पुलिस सीधे दस्तावेज मंगवा सकेगी, तो जांच पूरी करने और आरोपपत्र दाखिल करने में तेजी आ सकती है। इससे अदालतों में सुनवाई की प्रक्रिया भी समय पर शुरू करने में मदद मिलेगी।

विशेषकर साइबर अपराध, आर्थिक अपराध और संपत्ति से जुड़े मामलों में यह बदलाव बहुत कारगर साबित हो सकता है, क्योंकि इन मामलों में सबसे अधिक दस्तावेजों की जरूरत होती है।

मध्यप्रदेश पुलिस का यह कदम पूरे देश के लिए एक मॉडल बन सकता है। अक्सर कहा जाता है कि भारतीय पुलिस के पास अधिकार कम और प्रक्रियाएं अधिक हैं, जिसकी वजह से जांच में देरी होती है और अपराधियों को लाभ मिल जाता है। यह बदलाव इस स्थिति को सुधारने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह बताता है कि यदि पुलिस को उचित कानूनी अधिकार दिए जाएं और उसकी जवाबदेही तय की जाए, तो जांच में तेजी आ सकती है और आम आदमी को न्याय जल्दी मिल सकता है।

जरूरत है कि इस नए नियम का प्रचार-प्रसार आम लोगों तक किया जाए, ताकि हर व्यक्ति को पता चले कि जांच के सिलसिले में जारी समन एक कानूनी दस्तावेज है और उसका पालन करना जरूरी है। साथ ही, पुलिस को भी प्रशिक्षण दिया जाए कि समन कैसे लिखना है, किस भाषा का उपयोग करना है और कानूनी मर्यादाओं का पालन कैसे करना है। कुल मिलाकर, यह बदलाव पुलिस की कार्यशैली में पारदर्शिता और तेजी लाने के साथ अपराधों की जांच को अधिक पेशेवर बना सकता है। यही सुशासन की पहचान है।

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