वॉशिंगटन, 18 अप्रैल।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि संयुक्त राज्य अमेरिका और ईरान मिलकर होर्मुज जलडमरूमध्य से समुद्री बारूदी सुरंगों को हटाने का काम कर रहे हैं। यह दावा ऐसे समय सामने आया है, जब तेहरान ने हाल ही में इस अहम समुद्री मार्ग को वाणिज्यिक जहाजों के लिए फिर से खोलने की घोषणा की है।
ट्रम्प ने अपने संदेश में कहा कि ईरान ने अमेरिका की सहायता से समुद्री सुरंगों को हटाया है या हटाने की प्रक्रिया में है। यह बयान ऐसे समय आया है, जब पिछले कुछ हफ्तों से इस क्षेत्र में तनाव बना हुआ था और जलडमरूमध्य में सुरंगें बिछाए जाने की खबरों के कारण जहाजों की आवाजाही प्रभावित हुई थी।
होर्मुज जलडमरूमध्य, जो ईरान और ओमान के बीच स्थित है, वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20 प्रतिशत संभालता है। इस मार्ग में किसी भी प्रकार की बाधा अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए बड़ी चिंता का कारण बनती है। हाल के समय में यहां प्रतिबंध और जोखिम बढ़ने से कई जहाजों को अपने मार्ग बदलने पड़े थे।
ट्रम्प ने कहा कि इस संयुक्त प्रयास से समुद्री मार्ग पर सामान्य वाणिज्यिक गतिविधियां फिर से बहाल हो सकेंगी। इससे पहले उन्होंने जलडमरूमध्य के खुलने को दुनिया के लिए सकारात्मक संकेत बताया था और इसे क्षेत्रीय तनाव कम करने की दिशा में एक कदम माना था। हालांकि, ईरान की ओर से इस संयुक्त अभियान को लेकर पूरी तरह पुष्टि नहीं की गई है।
ईरानी अधिकारियों ने यह जरूर कहा है कि युद्धविराम की अवधि में जलडमरूमध्य वाणिज्यिक जहाजों के लिए पूरी तरह खुला है, लेकिन उन्होंने अमेरिका के साथ किसी औपचारिक समझौते या व्यापक सहयोग की बात से इनकार किया है। कुछ प्रतिनिधियों का कहना है कि यह कदम केवल मौजूदा स्थिति को नियंत्रित करने के लिए अस्थायी रूप से उठाया गया है।
इस बीच, ट्रम्प के दावे पर कई लोगों ने संदेह भी जताया है और सोशल मीडिया पर इसकी सत्यता को लेकर सवाल उठाए गए हैं। कुछ प्रतिक्रियाओं में कहा गया कि इस तरह के सहयोग की पुष्टि तभी मानी जा सकती है, जब ईरान भी स्पष्ट रूप से यही बात कहे।
विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्री सुरंगों को हटाना एक जटिल और जोखिम भरी प्रक्रिया होती है, क्योंकि ये सुरंगें अपनी जगह से खिसककर भी लंबे समय तक खतरा बनी रह सकती हैं। ऐसे में समुद्री बीमा कंपनियां और जहाज संचालक पूरी तरह सुरक्षित स्थिति घोषित होने तक सतर्क रुख अपनाए रख सकते हैं।
फिलहाल ट्रम्प का यह बयान अमेरिका और ईरान के संबंधों में एक नया मोड़ लेकर आया है, और दुनिया की नजर इस पर टिकी है कि क्या इस सीमित समन्वय से आगे चलकर व्यापक बातचीत की राह खुलेगी।





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