भोपाल, 27 अप्रैल
मध्य प्रदेश विधानसभा में सोमवार को आयोजित विशेष सत्र के दौरान महिला आरक्षण एवं नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर चर्चा के बीच कांग्रेस विधायक फूल सिंह बरैया के एक बयान को लेकर सदन में तीव्र हंगामा देखने को मिला। उनके कथन “महिलाएं 2000 वर्षों से पैरों की जूती बनी रही” पर सत्तापक्ष ने कड़ा ऐतराज जताया।
चर्चा के दौरान कांग्रेस विधायक ने महिला आरक्षण को लेकर सवाल उठाते हुए कहा कि समाज में महिला और पुरुष गाड़ी के दो पहियों की तरह हैं, लेकिन इनमें से एक पहिया अभी भी पीछे है, जिस पर गंभीर विमर्श आवश्यक है। उन्होंने यह भी कहा कि महिलाओं को लंबे समय से सामाजिक रूप से दबाया गया है और इस सोच में बदलाव जरूरी है।
बरैया ने आगे टिप्पणी करते हुए कहा कि महिलाएं पिछले दो हजार वर्षों से उपेक्षा का शिकार रही हैं, जबकि कांग्रेस का इतिहास भी 150 वर्षों का है। उनके इस बयान पर सत्ता पक्ष के सदस्यों ने तीखी प्रतिक्रिया दी और सदन का माहौल गरमा गया।
मंत्री कृष्णा गौर ने इस टिप्पणी को महिलाओं का अपमान बताते हुए उनसे सार्वजनिक माफी की मांग की और कहा कि इस प्रकार की भाषा स्वीकार्य नहीं है। विधानसभा अध्यक्ष नरेन्द्र सिंह तोमर ने भी उन्हें विषय पर ही सीमित रहने की हिदायत दी। मंत्री राकेश सिंह ने कहा कि जहां एक ओर महिला आरक्षण जैसे गंभीर विषय पर चर्चा हो रही है, वहीं कांग्रेस द्वारा महिलाओं के प्रति असम्मानजनक टिप्पणी की जा रही है।
विवाद बढ़ने पर कांग्रेस विधायक ने सफाई देते हुए कहा कि उनका उद्देश्य महिलाओं का अपमान करना नहीं था, बल्कि उनकी स्थिति पर ध्यान आकर्षित करना था। वहीं भाजपा विधायक अर्चना चिटनिस ने इस बयान को अनुचित बताते हुए कहा कि इस प्रकार की सोच समझ से परे है और इसकी कड़ी निंदा की जानी चाहिए।
मुख्यमंत्री ने भी इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि सदन में विषय से भटकाव नहीं होना चाहिए और चर्चा को स्पष्ट दिशा में रखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि महिलाओं के अधिकारों के लिए लंबे समय से संघर्ष चलता आया है और देश में कई महापुरुषों ने इस दिशा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। साथ ही उन्होंने महिला आरक्षण को आगे बढ़ाने में केंद्र सरकार के प्रयासों का उल्लेख किया।
भाजपा विधायकों ने भी विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि महिला आरक्षण जैसे महत्वपूर्ण विषय पर कांग्रेस का रुख विरोधाभासी रहा है और संसद में भी इस विषय पर उसका समर्थन नहीं मिला था। उन्होंने महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण को आवश्यक बताया।
इस दौरान सदन में कविता और अन्य टिप्पणियों के बीच बहस तेज होती रही, जिस पर अध्यक्ष ने हस्तक्षेप करते हुए व्यवस्था बनाए रखने की अपील की।













