भोपाल, 30 मार्च।
मध्य प्रदेश विधानसभा में सोमवार को युवा नेतृत्व और लोकतंत्र के सशक्तिकरण पर जोर देखने को मिला। नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने कहा कि लोकतंत्र की मजबूत जड़ों के लिए युवा नेतृत्व का विकास जरूरी है और इसके लिए छात्र संघ चुनाव एक महत्वपूर्ण मंच हैं। उन्होंने विधानसभा में आयोजित मध्यप्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के युवा विधायक सम्मेलन में हिस्सा लेते हुए लोकतांत्रिक मूल्यों, जनसेवा और कार्यप्रणाली पर विस्तार से चर्चा की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर, राजस्थान विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी और संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय सहित कई युवा विधायक उपस्थित रहे।

सिंघार ने अपने संबोधन में कहा कि नेतृत्व पद से नहीं बल्कि कॉलेज जीवन से शुरू होता है और छात्र संघ चुनाव युवाओं में नेतृत्व क्षमता विकसित करने का सबसे सशक्त माध्यम रहे हैं। उन्होंने बताया कि हमारे यहां छात्र संघ चुनाव बंद हो गए हैं, जिससे युवा नेतृत्व के लिए मंच सीमित हो गया है। कॉलेज के समय युवाओं में बदलाव और नई सोच की ऊर्जा होती है, वहीं से भविष्य की दिशा तय होती है।
नेता प्रतिपक्ष ने कहा कि जनसेवा ही असली राजनीति है और चुनाव जीतना कोई कला नहीं है। यदि जनप्रतिनिधि ईमानदारी और निष्ठा के साथ जनता के काम करें, तो उनकी सफलता सुनिश्चित होती है। उन्होंने युवा विधायकों को यह भी समझाया कि विधानसभा में क्षेत्र की समस्याओं को प्रभावी तरीके से उठाना उनकी असली ताकत है।
सिंघार ने डिजिटल युग में एआई और डेटा साइंस के बढ़ते प्रभाव के बीच जिम्मेदारी से काम करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र तभी मजबूत होगा जब देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था सशक्त रहेगी और विधायकों को संसदीय परंपराओं के अनुसार नियम-कानून बनाने का अधिकार प्राप्त होगा।

नेता प्रतिपक्ष ने विकास कार्यों में राजनीति के हस्तक्षेप को कम करने की आवश्यकता बताई। सड़क, पानी, बिजली जैसी बुनियादी सुविधाएं सभी के लिए होती हैं और जनता की सेवा के लिए जनप्रतिनिधियों को पार्टी से ऊपर उठकर काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि विधानसभा की नियमित बैठकों में भागीदारी सुनिश्चित करना भी आवश्यक है ताकि विधायक क्षेत्र के लाखों लोगों की आवाज बन सकें। सीमित संसाधनों के बीच प्राथमिकताओं को तय कर अधिकतम लोगों को लाभ पहुंचाना ही सफल जनप्रतिनिधि की पहचान है।











