भोपाल, 24 अप्रैल
प्रदेश के लगभग पांच लाख संविदा एवं आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का निर्णय बड़ी राहत लेकर आया है। अदालत ने राज्य सरकार द्वारा दायर उस याचिका को स्वीकार करने से इनकार कर दिया, जिसमें संविदा कर्मचारियों से जुड़े मामले में अंतरिम रोक लगाने की मांग की गई थी।
यह याचिका 9 अप्रैल को दिए गए उस आदेश पर रोक लगाने के लिए प्रस्तुत की गई थी, जिसमें यह कहा गया था कि 10 वर्ष से अधिक सेवा पूर्ण कर चुके संविदा कर्मचारियों के नियमितीकरण पर विचार किया जा सकता है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि यह मामला व्यापक वर्ग से संबंधित है, इसलिए इस पर फिलहाल रोक उचित नहीं मानी जा सकती। साथ ही सरकार को निर्देश दिया गया कि वह अपना पक्ष सिंगल बेंच के समक्ष रखे।
इस निर्णय के बाद संविदा कर्मचारी अधिकारी महासंघ के प्रदेश अध्यक्ष रमेश राठौर ने कहा कि यह आदेश प्रदेश के लाखों संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों के लिए राहतकारी है। उन्होंने कहा कि अदालत ने कर्मचारियों की लंबे समय से चली आ रही पीड़ा को समझा है। उनके अनुसार संविदा कर्मियों को वेतनमान और भत्तों जैसी सुविधाओं से वंचित रखा जाता रहा है तथा उनके साथ समान व्यवहार नहीं किया जाता।









