जबलपुर, 24 अप्रैल
मध्यप्रदेश में नर्सिंग फर्जीवाड़ा मामले को लेकर एक बार फिर हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई, जिसमें न्यायालय ने स्पष्ट किया कि बिना अनुमति किसी भी नर्सिंग परीक्षा का आयोजन नहीं किया जा सकेगा। यह निर्णय युगलपीठ ने सुनवाई के दौरान दिया, जिसमें आगामी परीक्षाओं को लेकर सख्त रुख अपनाया गया।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि नर्सिंग काउंसिल को किसी भी परीक्षा के आयोजन से पहले उच्च न्यायालय से अनुमति लेना अनिवार्य होगा। इस मामले की अगली सुनवाई अब 28 अप्रैल को निर्धारित की गई है, जिसमें आगे की प्रक्रिया पर विचार किया जाएगा।
उल्लेखनीय है कि नर्सिंग कॉलेजों की मान्यता और संचालन को लेकर दायर जनहित याचिका में 2020-21 में खुले सैकड़ों संस्थानों की प्रक्रिया को चुनौती दी गई थी। इस पर हुई जांच में बड़ी संख्या में कॉलेजों को मानकों के अनुरूप नहीं पाया गया था, जहां आवश्यक सुविधाओं की भारी कमी सामने आई थी।
जांच रिपोर्ट में यह भी सामने आया था कि कई संस्थानों में भवन, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, योग्य शिक्षक और पर्याप्त अस्पताल सुविधा जैसी अनिवार्य व्यवस्थाएं नहीं थीं, जिससे शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हुए थे।
यह भी पाया गया कि कई कॉलेज केवल कागजों पर संचालित हो रहे थे, जबकि कुछ शिक्षक और प्राचार्य एक साथ कई संस्थानों में कार्यरत दिखाए गए थे, जिससे व्यवस्था की पारदर्शिता पर सवाल उठे।
आवेदन में यह आरोप भी लगाया गया था कि जिन कॉलेजों को अपात्र पाया गया था, उनके छात्रों को अन्य उपयुक्त संस्थानों में स्थानांतरित करने के बजाय उनकी परीक्षाएं ही कराई जा रही थीं, जिससे छात्रों के भविष्य पर असर पड़ सकता है।
हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद स्पष्ट निर्देश दिए कि बिना न्यायालय की अनुमति किसी भी प्रकार की परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी। इसके साथ ही नर्सिंग काउंसिल को निर्देशित किया गया है कि वह अनुमति के लिए आवेदन प्रस्तुत करे, जिसके आधार पर आगे का निर्णय लिया जाएगा।










