नई दिल्ली में केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने बुधवार को कहा कि भारत की प्राचीन और ऐतिहासिक महत्व की मूर्तियां केवल कला वस्तुएं नहीं, बल्कि हमारी हजारों वर्षों पुरानी सभ्यता की निरंतरता का जीवंत प्रमाण हैं। उन्होंने यह बात राष्ट्रीय संग्रहालय में आयोजित एक संवाददाता सम्मेलन के दौरान भारत की सांस्कृतिक विरासत की वापसी से जुड़ी उपलब्धियों को साझा करते हुए कही।
शेखावत ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में चल रहे ‘विरासत संरक्षण’ अभियान के तहत अब तक कुल छह सौ छियासठ प्राचीन कलाकृतियां भारत वापस लाई जा चुकी हैं। इनमें से छह सौ तिरपन वस्तुएं केवल वर्ष दो हजार चौदह के बाद देश में लौटाई गई हैं, जबकि वर्ष उन्नीस सौ बहत्तर से दो हजार चौदह के बीच केवल तेरह पुरावस्तुएं ही वापस आ सकी थीं।
उन्होंने कहा कि सरकार उन सभी सांस्कृतिक धरोहरों को वापस लाने के लिए प्रतिबद्ध है जो गलत तरीके से देश से बाहर ले जाई गई थीं। उन्होंने यह भी बताया कि अमेरिकी एजेंसियों ने छह सौ सत्तावन अन्य कलाकृतियां जब्त की हैं, जिन्हें भारतीय दूतावास को सौंप दिया गया है और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा उनका परीक्षण और मूल्यांकन किया जाएगा।
मंत्री ने जानकारी दी कि हाल ही में अमेरिका से दो महत्वपूर्ण मूर्तियां भारत वापस आई हैं, जिनमें चोल काल की सोमस्कंद की मूर्ति और विजयनगर काल की कांस्य प्रतिमाएं शामिल हैं। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया से भी कुल ग्यारह मूर्तियां प्राप्त हुई हैं, जिनमें शुंग कालीन टेराकोटा, पाल वंश की वराह प्रतिमा और बोधिसत्व प्रतिमा जैसी महत्वपूर्ण धरोहरें शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि भारत और अमेरिका के बीच सांस्कृतिक संपत्ति विनिमय समझौते के बाद इस प्रक्रिया में तेजी आई है। अमेरिकी स्मिथसोनियन संस्थान ने तमिलनाडु के मंदिरों से जुड़ी तीन महत्वपूर्ण कांस्य मूर्तियां भारत को सौंपी हैं। साथ ही तंजावुर मंदिर की शिव नटराज मूर्ति को तीन वर्ष के अल्पकालिक लोन पर अमेरिका में प्रदर्शनी के लिए रखा गया है।
शेखावत ने यह भी कहा कि 127 वर्षों बाद भगवान बुद्ध के अवशेषों की वापसी भारत के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है। उन्होंने बताया कि बरामद पुरावशेषों के लिए लाल किले में एक विशेष गैलरी तैयार की गई है, जिसे और विकसित किया जा रहा है।




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