बेंगलुरु, 13 मई।
बेंगलुरु स्थित हिंदी रचनाकारों की प्रमुख संस्था ‘शब्द’ ने साहित्य और हिंदी भाषा के संवर्द्धन के उद्देश्य से दिए जाने वाले अपने दो वार्षिक पुरस्कारों के लिए प्रविष्टियां आमंत्रित की हैं। संस्था द्वारा घोषित इन पुरस्कारों में एक लाख रुपये का ‘अज्ञेय शब्द सृजन सम्मान’ और पच्चीस हजार रुपये का ‘दक्षिण भारत शब्द हिंदी सेवी सम्मान’ शामिल है।
‘अज्ञेय शब्द सृजन सम्मान’ देश के किसी एक प्रतिष्ठित साहित्यकार को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के आधार पर प्रदान किया जाता है। इस सम्मान के लिए चयन देश के प्रमुख साहित्यकारों, संपादकों, विद्वानों और प्रकाशन संस्थानों द्वारा अनुशंसित नामों तथा पिछले तीन वर्षों (2023 से 2025) में प्रकाशित कृतियों के पारदर्शी मूल्यांकन के आधार पर किया जाएगा।
प्रविष्टि में रचनाकार का नाम, संपर्क विवरण जिसमें मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी शामिल हैं, पिछले तीन वर्षों में प्रकाशित पुस्तक का विवरण और उसकी विशेषता, प्रकाशक की जानकारी तथा लेखक के समग्र साहित्यिक योगदान का अधिकतम 200 शब्दों में संक्षिप्त विवरण आवश्यक होगा। साथ ही संबंधित पुस्तक की चार प्रतियां भेजना अनिवार्य किया गया है।
दूसरा पुरस्कार ‘दक्षिण भारत शब्द हिंदी सेवी सम्मान’ दक्षिण भारत में हिंदी भाषा और साहित्य के विकास में उल्लेखनीय योगदान देने वाले किसी विशिष्ट हिंदी सेवी को प्रदान किया जाएगा। इसका चयन भी साहित्यकारों, संपादकों और सार्वजनिक जीवन से जुड़े प्रतिष्ठित व्यक्तियों की अनुशंसाओं के आधार पर किया जाएगा।
प्रस्तावित प्रविष्टियां आगामी 30 जून 2026 तक ‘शब्द’ संस्था के बेंगलुरु स्थित पते पर भेजी जानी हैं। संस्था के अध्यक्ष डॉ. श्रीनारायण समीर के अनुसार इन पुरस्कारों का उद्देश्य हिंदी साहित्य और भाषा के संवर्द्धन को प्रोत्साहित करना है।
संस्था ने बताया कि ‘अज्ञेय शब्द सृजन सम्मान’ का व्यय समाजसेवी सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन अज्ञेय से जुड़े श्री बाबूलाल गुप्ता फाउंडेशन द्वारा वहन किया जाता है, जबकि ‘दक्षिण भारत शब्द हिंदी सेवी सम्मान’ का व्यय एक प्रमुख हिंदी दैनिक समाचार पत्र द्वारा वहन किया जाता है। शेष व्यय संस्था के सदस्यों द्वारा स्वेच्छा से वहन किया जाता है।
संस्था ने यह भी बताया कि इन पुरस्कारों की शुरुआत वर्ष 2022 में अपने रजत जयंती वर्ष के अवसर पर की गई थी और 1997 से संस्था की मासिक रचना गोष्ठियां तथा वार्षिक कार्यक्रम लगातार जारी हैं।





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