चेन्नई, 12 मई।
तमिलनाडु विधानसभा में मंगलवार को पूर्व उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन के बयान के बाद राजनीतिक हलचल तेज हो गई। सदन में बोलते हुए उन्होंने कहा कि सनातन धर्म को समाप्त किया जाना चाहिए, क्योंकि यह समाज में विभाजन पैदा करता है। उनके इस वक्तव्य के बाद राज्य की सियासत में एक बार फिर बहस शुरू हो गई है।
विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि कुछ परंपराएं सामाजिक असमानता को बढ़ावा देती हैं और लोगों के बीच दूरी पैदा करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य में आयोजित सरकारी कार्यक्रमों में तमिल थाई वाझथु को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। उनके अनुसार परंपराओं का सम्मान अपनी जगह जरूरी है, लेकिन तमिल पहचान को सर्वोच्च महत्व दिया जाना चाहिए।
यह पहला मौका नहीं है जब उदयनिधि स्टालिन के बयान को लेकर विवाद खड़ा हुआ हो। इससे पहले वर्ष 2023 में भी उन्होंने सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया जैसी बीमारियों से की थी, जिसके बाद देशभर में तीखी प्रतिक्रियाएं सामने आई थीं। इस टिप्पणी को लेकर मामला न्यायालय तक पहुंचा था और वर्ष 2025 में सर्वोच्च न्यायालय की ओर से उन्हें फटकार भी मिली थी।
अपने ताजा संबोधन में उन्होंने कहा कि कुछ धार्मिक परंपराएं सामाजिक समानता के रास्ते में बाधा बनती हैं और ऐसे विषयों पर पुनर्विचार की जरूरत है। उनके बयान के बाद विपक्षी दलों ने कड़ी आपत्ति जताते हुए इसे सामाजिक तनाव बढ़ाने वाला बताया है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस बयान ने तमिलनाडु की राजनीति में एक नई बहस को जन्म दे दिया है। आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाएं और तेज होने की संभावना जताई जा रही है। विधानसभा में बयान के समय मौजूद अन्य नेताओं की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई।









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