जयपुर, 12 मई।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी द्वारा नीट यूजी 2026 परीक्षा को रद्द कर नई तिथियों पर पुनः परीक्षा आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही इस मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो को सौंप दी गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि इस प्रक्रिया में नए पंजीकरण या अतिरिक्त शुल्क नहीं लिया जाएगा, पूर्व में दर्ज सभी अभ्यर्थियों का डेटा सुरक्षित रहेगा तथा परीक्षा शुल्क वापस किया जाएगा।

इसी बीच नीट यूजी 2026 पेपर लीक मामले में राजस्थान पुलिस की विशेष अभियान समूह ने अब तक 15 लोगों को हिरासत में लिया है। इनमें जयपुर निवासी मनीष को इस पूरे प्रकरण का कथित मुख्य साजिशकर्ता माना जा रहा है। पुलिस अब पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही है और धन के लेन-देन की कड़ियों को भी खंगाल रही है।
जांच के दौरान कई मोबाइल फोन जब्त किए गए, जिनमें प्रश्न बैंक साझा किए जाने के प्रमाण मिले हैं। अधिकारियों के अनुसार लगभग 60 प्रश्न वास्तविक परीक्षा में पूछे गए प्रश्नों से हूबहू मेल खाते हैं, जिनमें शब्दों और विराम चिन्हों तक कोई बदलाव नहीं पाया गया।
पुलिस ने एक व्हाट्सऐप समूह का भी पता लगाया है, जिसका नाम ‘प्राइवेट माफिया’ बताया गया है। इस समूह में 400 से अधिक सदस्य जुड़े थे और समूह विवरण में स्पष्ट रूप से लिखा था कि इसका उद्देश्य केवल प्रश्न बैंक साझा करना है तथा इसे बाहर प्रसारित नहीं करना है।
जांच में यह भी सामने आया है कि पेपर लीक की शुरुआत राजस्थान के सीकर जिले से हुई थी, जिसे जांच का मुख्य केंद्र बनाया गया है। पुलिस को संदेह है कि सीकर स्थित एक परामर्श केंद्र संचालक राकेश मंडावरिया की इस पूरे नेटवर्क में अहम भूमिका रही है।
सूत्रों के अनुसार मंडावरिया को यह प्रश्न बैंक अप्रैल माह में प्राप्त हुआ था। चूरू के एक विद्यार्थी, जो केरल में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहा है, को भी सीकर से यह प्रश्न बैंक पीडीएफ के रूप में भेजा गया था। इसके अलावा यह प्रश्न पत्र झुंझुनूं और देहरादून तक पहुंचने के संकेत भी मिले हैं। जांच में यह भी पता चला है कि यह सामग्री ऑनलाइन और मुद्रित दोनों रूपों में विद्यार्थियों तक पहुंचाई गई।
फिलहाल विशेष अभियान समूह यह पता लगाने में जुटा है कि यह प्रश्न पत्र किन-किन राज्यों तक पहुंचा और इस पूरे मामले में कितनी आर्थिक लेन-देन हुई।
पुलिस के अतिरिक्त महानिदेशक ने बताया कि जांच एक ऐसे ‘अनुमानित प्रश्नपत्र’ पर आधारित है जिसमें लगभग 410 प्रश्न थे, जिनमें से 120 से अधिक प्रश्न रसायन विज्ञान से संबंधित थे। उन्होंने कहा कि यह पेपर परीक्षा से लगभग 15 दिन से एक माह पहले से विद्यार्थियों के बीच फैलना शुरू हो गया था और इसकी जांच उसी आधार पर की जा रही है।
राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि परीक्षा प्रश्नपत्रों को जीपीएस-सक्षम वाहनों में विशेष सुरक्षा चिन्हों के साथ ले जाया गया था। परीक्षा केंद्रों की निगरानी कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सीसीटीवी से केंद्रीय नियंत्रण कक्ष से की गई थी। अभ्यर्थियों की बायोमेट्रिक जांच की गई और 5जी जैमर का उपयोग भी किया गया। एजेंसी ने कहा कि परीक्षा सभी केंद्रों पर शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई।
एजेंसी ने यह भी कहा कि वह जांच के निष्कर्षों पर पूर्व में कोई निर्णय नहीं लेगी और जो भी तथ्य सामने आएंगे, उन्हें पारदर्शिता के साथ सार्वजनिक किया जाएगा।







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