ढाका, 12 मई।
बांग्लादेश के उच्चतम न्यायालय के अपीलीय विभाग ने अपने हालिया विस्तृत निर्णय में एक महत्वपूर्ण स्वीकारोक्ति करते हुए अपने पूर्व फैसले पर खेद व्यक्त किया है। यह मामला 1971 के युद्ध के दौरान मानवता के खिलाफ अपराधों से जुड़े एक प्रकरण से संबंधित है, जिसमें बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के नेता एटीएम अजहरुल इस्लाम की मौत की सजा को पहले बरकरार रखा गया था।
74 पृष्ठों के विस्तृत फैसले में, तत्कालीन प्रधान न्यायाधीश सैयद रेफात अहमद की अध्यक्षता वाली सात सदस्यीय पीठ ने कहा कि अपीलीय विभाग ने अपने पूर्व निर्णय में साक्ष्यों की कमी और व्यापक संदर्भ पर निष्पक्ष रूप से विचार करने में चूक की थी। न्यायालय ने यह भी स्वीकार किया कि उस समय लिया गया निर्णय पूरी न्यायिक जिम्मेदारी के अनुरूप नहीं था।
अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि गंभीर आपराधिक मामलों में जिस स्तर की जांच और निष्पक्षता अपेक्षित होती है, पहले का फैसला उस मानक पर खरा नहीं उतर सका, जिसे लेकर खेद व्यक्त किया जाता है।
27 मई 2025 को अपीलीय विभाग ने अपने पुराने फैसले को निरस्त करते हुए 2014 में अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण द्वारा दी गई मौत की सजा को भी रद्द कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने एटीएम अजहरुल इस्लाम को सभी आरोपों से मुक्त कर दिया और जेल अधिकारियों को निर्देश दिया कि यदि वे किसी अन्य मामले में वांछित नहीं हैं तो उन्हें तुरंत रिहा किया जाए।
यह निर्णय उनकी अपील पर सुनवाई के बाद सुनाया गया, जिसमें उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अपराध न्यायाधिकरण के फैसले को चुनौती दी थी। उनके वकील के अनुसार, अजहरुल इस्लाम 8 अगस्त 2012 से जेल में बंद थे और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद 28 मई 2025 को रिहा कर दिए गए।
वर्तमान में एटीएम अजहरुल बांग्लादेश जमात-ए-इस्लामी के नायब-ए-अमीर हैं और 12 फरवरी को हुए राष्ट्रीय चुनाव में रंगपुर-2 सीट से सांसद चुने गए हैं।
उल्लेखनीय है कि 1971 के मानवता के खिलाफ अपराध मामलों में जमात नेता मतिउर रहमान निजामी, अब्दुल कादर मुल्ला, मोहम्मद कमरूज्जमान, अली अहसान मोहम्मद मुजाहिद, मीर कासिम अली तथा बीएनपी नेता सलाहुद्दीन कादर चौधरी को सुप्रीम कोर्ट के विभिन्न फैसलों के बाद फांसी दी जा चुकी है।








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