अनूपपुर, 25 मई ।
मध्य प्रदेश के अनूपपुर जिले स्थित पवित्र तीर्थ अमरकंटक में गंगा दशहरा का पर्व विशेष आस्था और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है, जहां इसे नदियों के दिव्य मिलन और आध्यात्मिक ऊर्जा के उत्सव के रूप में देखा जाता है।
धार्मिक मान्यता के अनुसार इस पावन अवसर पर मां गंगा का प्रतीकात्मक रूप से मां नर्मदा से मिलने अमरकंटक आगमन माना जाता है, जिससे इस स्थान का धार्मिक महत्व और अधिक बढ़ जाता है।
भारतीय सनातन परंपरा में गंगा दशहरा को पापों के नाश और आत्मशुद्धि का महापर्व माना गया है, जिसमें स्नान, दान, जप और तप का विशेष महत्व बताया गया है।
मान्यता है कि ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि पर मां गंगा का पृथ्वी पर अवतरण हुआ था, जिसके कारण यह तिथि गंगा दशहरा के रूप में प्रसिद्ध हुई और इसे पुण्यकारी पर्व माना जाता है।
धार्मिक परंपराओं के अनुसार इस दिन किए गए स्नान और पूजन से जीवन के विविध पापों का क्षय होता है और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग प्रशस्त होता है।
गंगा दशहरा पर विशेष प्रकार के स्नान और धार्मिक अनुष्ठानों का भी महत्व बताया गया है, जिसमें श्रद्धालु विभिन्न विधियों से पवित्र स्नान कर ईश्वर आराधना करते हैं।
अमरकंटक में इस दिन श्रद्धालु मां नर्मदा और अन्य पवित्र नदियों में स्नान कर वस्त्र दान, जप और उपवास जैसे धार्मिक कर्मों में भाग लेते हैं।
स्थानीय परंपराओं के अनुसार स्नान के बाद शिवलिंग पूजन, दीप प्रज्वलन और रात्रि जागरण का विशेष महत्व माना गया है, जिससे पर्व की धार्मिक ऊर्जा और बढ़ जाती है।
यह पर्व केवल जल पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि भारतीय संस्कृति में नदियों के प्रति सम्मान, संरक्षण और प्रकृति से जुड़ी आस्था का संदेश भी देता है।






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