नई दिल्ली, 19 मई ।
सुप्रीम कोर्ट ने आवारा कुत्तों को दूसरी जगह स्थानांतरित करने और उनकी नसबंदी से जुड़े अपने 7 नवंबर 2025 के आदेश में किसी भी प्रकार के संशोधन या वापसी की सभी अर्जियों को एक साथ खारिज कर दिया है। अदालत ने स्पष्ट टिप्पणी करते हुए कहा कि आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से निपटने के लिए आवश्यक ढांचे के निर्माण में केंद्र और राज्यों की ओर से लगातार पर्याप्त प्रयास नहीं किए गए हैं।
सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि देश के विभिन्न हिस्सों से ऐसी घटनाओं की खबरें सामने आ रही हैं, जिनमें बच्चों और बुजुर्गों पर हमले हुए हैं, जिससे आम नागरिक सार्वजनिक स्थानों पर असुरक्षित महसूस कर रहे हैं। अदालत ने यह भी कहा कि इस समस्या के कारण अंतरराष्ट्रीय यात्रियों तक को घटनाओं का सामना करना पड़ा है।
सुप्रीम कोर्ट ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को निर्देश दिया कि प्रत्येक जिले में कम से कम एक पूर्ण रूप से कार्यरत पशु जन्म नियंत्रण केंद्र की स्थापना सुनिश्चित की जाए, जिसमें आवश्यक ढांचा, शल्य चिकित्सा सुविधाएं और सहायक व्यवस्थाएं उपलब्ध हों तथा सभी कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया जाए।
अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि सभी सरकारी चिकित्सा केंद्रों में एंटी रेबीज वैक्सीन और इम्युनोग्लोबुलिन पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहनी चाहिए। साथ ही राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर आवारा पशुओं की समस्या के समाधान के लिए प्रभावी व्यवस्था करने को भी कहा गया।
कोर्ट ने कहा कि ऐसे मामलों में जहां कुत्ते गंभीर रूप से असाध्य रोग से ग्रस्त हों, रेबीज से पीड़ित हों या अत्यंत आक्रामक और खतरनाक हों, वहां मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित पशु नियंत्रण नियमों के तहत आवश्यक कार्रवाई पर विचार किया जा सकता है।
अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि इन निर्देशों को लागू करने वाले अधिकारियों को उनके कार्यों के लिए पर्याप्त सुरक्षा दी जाएगी और उनके खिलाफ किसी प्रकार की आपराधिक कार्रवाई या प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाएगी, बशर्ते वे सद्भावना के साथ कार्य करें। सुप्रीम कोर्ट ने सभी निर्देशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित करने को कहा है।












