वाराणसी, 23 मार्च।
उत्तर प्रदेश की पावन नगरी वाराणसी में चैत्र नवरात्र की पंचमी पर मां विशालाक्षी गौरी और स्कंदमाता के दर्शनों के लिए सोमवार को श्रद्धालुओं का विशाल उत्सव रहा। मीरघाट स्थित शक्तिपीठ विशालाक्षी गौरी एवं जैतपुरा स्थित बागेश्वरी देवी मंदिरों में भक्त सुबह से कतारबद्ध होकर दर्शन-पूजन के लिए पहुंचे। श्रद्धालुओं ने घर-परिवार और समाज की सुख-शांति की प्रार्थना की।
जैतपुरा स्थित स्कंदमाता मंदिर में पुजारी की देखरेख में पंचामृत स्नान और विशेष श्रृंगार किया गया। वैदिक मंत्रोच्चार और भोग-आरती के बाद दर्शन आम लोगों के लिए खुला। बागेश्वरी माता को विद्या की देवी माना जाता है और नवरात्र में विद्यार्थी भी बड़ी संख्या में दर्शन-पूजन के लिए आते हैं।
मंदिर के पुजारी गोपाल गुरू ने बताया कि स्कंदमाता भक्तों की सच्ची मनोकामनाओं को पूर्ण करती हैं। बालरूप में गोद में बैठे भगवान स्कंद के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। सूर्यमंडल की अधिष्ठात्री देवी होने के कारण उनकी उपासना से अलौकिक तेज और कांति की प्राप्ति होती है।
विशालाक्षी मंदिर के पुजारी पं. राजनाथ तिवारी ने बताया कि देवी को कमल के पुष्प अत्यंत प्रिय हैं। काशी के नवशक्ति पीठों में मां विशालाक्षी का विशेष स्थान है। मान्यता है कि इस स्थान पर मां सती का कर्ण-कुंडल और एक अंग गिरा था। विशालाक्षी के दर्शन से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और संतान सुख की प्राप्ति में भी आशीर्वाद मिलता है।
श्रद्धालु गीता मोदनवाल, सुधा केशरवानी और मधुमिता चौबे ने बताया कि पंचमी तिथि पर मां विशालाक्षी के दर्शन से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और भक्त पूर्ण संतुष्टि पाते हैं।












