नई दिल्ली, 04 नवंबर।
केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने दवा निर्माण में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए औषधि नियम, 1945 में संशोधन का प्रस्ताव दिया है। इसके तहत दवा कंपनियों को बाजार में किसी बैच को भेजने से पहले उसकी मंजूरी देने के लिए योग्य और अनुभवी अधिकारी नियुक्त करना पड़ सकता है।
प्रस्ताव के अनुसार, संबंधित नियमों के तहत लाइसेंस प्राप्त दवा निर्माताओं को बैच जारी करने की जिम्मेदारी संभालने के लिए उपयुक्त योग्यता और अनुभव वाले व्यक्ति को नामित करना होगा। कंपनियों को प्रत्येक बैच से जुड़े निर्धारित अभिलेख रखने और तय प्रारूप में बैच जारी करने का प्रमाणपत्र भी देना होगा।
मंत्रालय का कहना है कि प्रस्तावित बदलाव मौजूदा नियामकीय व्यवस्था की एक कमी को दूर करेगा। वर्तमान नियमों में निर्माताओं को उत्पादन और परीक्षण से जुड़े तकनीकी कर्मचारियों की जानकारी देनी होती है, लेकिन दवाओं के बैच को बाजार में भेजने की अनुमति देने वाले अधिकृत व्यक्ति का विवरण देना अनिवार्य नहीं है।
दवा निर्माण में बैच जारी करने की प्रक्रिया अहम मानी जाती है। बाजार में दवाएं पहुंचाने से पहले उत्पादन से जुड़े अभिलेख, गुणवत्ता नियंत्रण के आंकड़े और अन्य जरूरी दस्तावेजों की विस्तृत जांच की जाती है।
नए प्रावधान लागू होने से बैच जारी करने के निर्णय की जिम्मेदारी तय हो सकेगी। इससे उत्पादों की निगरानी में सुधार और दवाओं की गुणवत्ता पर नियामकीय नियंत्रण मजबूत होने की उम्मीद है।
मंत्रालय के मुताबिक, प्रस्तावित व्यवस्था दवा कंपनियों को अच्छी विनिर्माण प्रक्रियाओं के निर्धारित मानकों का पालन करने में मदद करेगी। बैच जारी करने का प्रमाणपत्र इस बात का लिखित सबूत होगा कि संबंधित दवा की जरूरी जांच और समीक्षा पूरी कर ली गई है तथा वह निर्धारित गुणवत्ता मानकों के अनुरूप है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने प्रस्तावित संशोधनों पर संबंधित पक्षों और आम लोगों से सुझाव तथा आपत्तियां मांगी हैं। इच्छुक लोग अपनी प्रतिक्रिया स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के अवर सचिव, औषधि विनियमन को भेज सकते हैं। इसके लिए मंत्रालय द्वारा अधिसूचित ईमेल पते का भी इस्तेमाल किया जा सकता है।















