काठमांडू, 14 अप्रैल
नेपाल में नववर्ष के उत्साहपूर्ण वातावरण के बीच मधेश और मिथिलांचल क्षेत्र में मंगलवार को सतुवाइन और जुड़ शीतल पर्व पूरे उल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया जा रहा है, जहां लोग आस्था और परंपरा के अनुरूप कुलदेवता की पूजा कर सतुवा अर्पित कर रहे हैं।
इस पर्व के दौरान चना, गेहूं, मक्का और जौ को मिलाकर तैयार किए जाने वाले सतुवा का विशेष महत्व है, जिसे पूजा के बाद प्रसाद के रूप में श्रद्धालुओं में वितरित किया जाता है और लोग इसे श्रद्धा के साथ ग्रहण करते हैं।
सतुवाइन पर्व के अगले दिन जुड़ शीतल मनाने की परंपरा है, जिसमें घर के बड़े सदस्य छोटे सदस्यों के सिर पर पानी छिड़ककर उन्हें स्वास्थ्य, शांति और दीर्घायु का आशीर्वाद प्रदान करते हैं, जिसे शुभ और पवित्र परंपरा माना जाता है।
इस अवसर पर चना-बदाम से बना सतुवा, दाल, मनुंगा साग की सब्जी, मूंगफली के आटे से बनी बरी तथा दही से तैयार विविध व्यंजन खाने की परंपरा भी निभाई जाती है, जो इस पर्व की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा है।
इसके साथ ही लोग खेतों में लगे पेड़-पौधों को पानी देकर उनकी हरियाली और उर्वरता बनी रहने की कामना करते हैं, जिससे प्रकृति के प्रति आभार और जुड़ाव की भावना भी व्यक्त होती है।
मधेश और मिथिला संस्कृति की गहरी पहचान से जुड़े इस पर्व को क्षेत्र के सभी समुदाय आपसी सद्भाव, भाईचारे और सामाजिक एकता के साथ मनाते हैं, जो इसकी सांस्कृतिक विशेषता को और मजबूत बनाता है।




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