काठमांडू, 14 अप्रैल
नेपाल की नई राजनीतिक व्यवस्था और उभरते नेतृत्व को लेकर अमेरिकी संसद की शोध इकाई कांग्रेसनल रिसर्च सर्विस द्वारा जारी रिपोर्ट में गहरे भू-राजनीतिक और आंतरिक राजनीतिक बदलावों का विश्लेषण करते हुए कई चुनौतियों की ओर संकेत किया गया है।
रिपोर्ट में नेपाल की वर्तमान राजनीतिक स्थिति, पुरानी स्थापित शक्तियों के कमजोर पड़ने और नए नेतृत्व के उभार का उल्लेख करते हुए चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव परियोजना तथा नेपाल में रह रहे तिब्बती शरणार्थियों से जुड़े मुद्दों को भी शामिल किया गया है।
‘नेपाल का संसदीय चुनाव’ शीर्षक से प्रकाशित इस रिपोर्ट में काठमांडू के पूर्व स्वतंत्र मेयर बालेन्द्र शाह और राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के बीच बने गठबंधन को वैचारिक एकता के बजाय परिस्थितिजन्य समझौता बताया गया है, जबकि उनके कार्यकाल को मिश्रित प्रदर्शन वाला और नीतिगत स्पष्टता से कमजोर भी माना गया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि गठबंधन सरकार बनने के बावजूद भविष्य में बालेन्द्र शाह और आरएसपी नेतृत्व के बीच संभावित मतभेद नई सरकार के लिए चुनौती बन सकते हैं, वहीं शाह के सोशल मीडिया आधारित संवाद शैली और सितंबर 2025 की हिंसक घटनाओं में उनकी भूमिका को लेकर भी जनमत प्रभावित होने की बात कही गई है।
इसके साथ ही रिपोर्ट में नेपाल की नई सरकार के सामने बढ़ती युवा बेरोजगारी, खाड़ी देशों से लौटते प्रवासी श्रमिक, ईरान युद्ध के कारण रेमिटेंस में संभावित गिरावट और ऊर्जा संकट जैसी आर्थिक तथा भू-राजनीतिक समस्याओं का भी उल्लेख किया गया है, जबकि भ्रष्टाचार विरोधी कदमों और सितंबर आंदोलन की हिंसा पर जवाबदेही तय करने को सरकार की परीक्षा बताया गया है।
विदेश नीति के संदर्भ में रिपोर्ट में बालेन्द्र शाह के दृष्टिकोण को व्यावहारिक और राष्ट्रीय हित केंद्रित बताया गया है तथा नेपाल की ‘संतुलित और स्वतंत्र’ विकास कूटनीति का उल्लेख करते हुए चीन की परियोजनाओं पर इसके प्रभाव को अभी अनिश्चित बताया गया है।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि नेपाल भारत, चीन और अमेरिका के साथ संतुलित संबंध बनाए हुए है, जबकि अमेरिका की दो प्रमुख चिंताओं में नेपाल के लिए रोकी गई सहायता और एमसीसी परियोजना तथा तिब्बती शरणार्थियों को दी जा रही आर्थिक मदद और चीन के कथित दबाव का उल्लेख किया गया है।




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