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विज्ञान व प्रौद्योगिकी
09 Apr, 2026

भारत में मेंढक से प्रेरित न्यूरोमॉर्फिक सेंसर का विकास, ऊर्जा खपत में कमी

भारत के वैज्ञानिकों ने मेंढक से प्रेरित एक नमी-संवेदनशील न्यूरोमॉर्फिक सेंसर विकसित किया है, जो ऊर्जा की खपत कम कर स्मार्ट और बुद्धिमान इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की दिशा में नया मार्ग प्रशस्त करता है।

बेंगलुरु, 09 अप्रैल 2026।

भारत में भविष्य की कंप्यूटिंग के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण खोज हुई है, जहां वैज्ञानिकों ने मेंढक से प्रेरित एक ऐसी नमी-संवेदनशील, मस्तिष्क-समतुल्य सेंसर विकसित की है, जो पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम में ऊर्जा की खपत को काफी कम कर सकती है।

यह नवाचारी न्यूरोमॉर्फिक सेंसर, जिसे जवाहरलाल नेहरू सेंटर फॉर एडवांस्ड साइंटिफिक रिसर्च (JNCASR) के वैज्ञानिकों ने विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के अंतर्गत विकसित किया है, जीववैज्ञानिक प्रणालियों की तरह सूचना को एक साथ महसूस, संसाधित और संग्रहीत करने की क्षमता रखता है। पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक्स इस कार्य को कुशलतापूर्वक नहीं कर पाती।

मानव मस्तिष्क के कार्य को नकल करने वाले न्यूरोमॉर्फिक इलेक्ट्रॉनिक्स को आधुनिक कंप्यूटिंग की बढ़ती ऊर्जा आवश्यकताओं के समाधान के रूप में देखा जा रहा है, विशेषकर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और एज कंप्यूटिंग के क्षेत्रों में। हालांकि, अधिकांश मौजूदा सिस्टम में सेंसिंग और प्रोसेसिंग अलग-अलग घटकों पर आधारित होती है, जिससे ऊर्जा की खपत बढ़ जाती है और डेटा ट्रांसफर में देरी होती है।

नई विकसित डिवाइस इस सीमा को पार कर, सेंसिंग, मेमोरी और प्रोसेसिंग को एक ही प्लेटफॉर्म पर समेकित करती है। यह एक-आयामी सुप्रामॉलेक्युलर नैनोफाइबर पर आधारित है और पर्यावरणीय नमी में बदलाव का जवाब देती है, ठीक वैसे ही जैसे कुछ उभयचर जीव करते हैं।

शोध टीम ने क्रिकेट फ्रॉग्स से प्रेरणा ली, जिनकी न्यूरल प्रतिक्रियाएं नमी और प्रकाश के प्रति अत्यधिक संवेदनशील होती हैं। सेंसर नमी में बदलाव का पता लगाता है और मस्तिष्क की सिनेप्टिक गतिविधि जैसी विद्युत प्रतिक्रियाएं उत्पन्न करता है, जिसमें स्मृति और अनुकूलन जैसी सीखने की क्षमताएं शामिल हैं।

वैज्ञानिकों के अनुसार, यह उपकरण न केवल नमी के बदलाव पर प्रतिक्रिया देता है, बल्कि पूर्ववर्ती उत्तेजनाओं को “याद” भी रख सकता है, जिससे सूचना संसाधन अधिक कुशल बनती है। प्रकाश की उपस्थिति से भी इसकी प्रतिक्रिया प्रभावित होती है, जिससे पर्यावरण संवेदनशीलता का एक और स्तर जुड़ जाता है।

इस सेंसर को चार्ज-ट्रांसफर कॉम्प्लेक्स से सुप्रामॉलेक्युलर नैनोफाइबर उगाकर, गिलास सब्सट्रेट पर गोल्ड इलेक्ट्रोड पर डिपॉजिट किया गया। नियंत्रित नमी परिस्थितियों में इसे परीक्षण किया गया और यह सिनेप्टिक प्रतिक्रियाओं जैसे सुविधा, डिप्रेशन, मेटा-प्लास्टिसिटी और बुनियादी लॉजिक ऑपरेशन की नकल करने में सक्षम पाया गया।

विशेषज्ञ मानते हैं कि इस खोज से स्मार्ट, ऊर्जा-कुशल सेंसर का नया वर्ग विकसित हो सकता है, जो पर्यावरणीय परिवर्तनों के प्रति अनुकूल प्रतिक्रियाएं दे सके। संभावित उपयोगों में पर्यावरण निगरानी, पहनने योग्य स्वास्थ्य उपकरण और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस व इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) के लिए उन्नत कंप्यूटिंग तकनीक शामिल हैं।

यह खोज, Journal of Materials Chemistry C में प्रकाशित हुई है, और यह प्राकृतिक जैविक नेटवर्क की तरह कार्य करने वाले सतत और बुद्धिमान इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।

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