मीरजापुर, 24 मार्च।
नवरात्र के पावन अवसर पर विंध्याचल क्षेत्र के अकोढ़ी गांव स्थित कंकाल काली देवी मंदिर में मंगलवार को भी भोर की आरती और भव्य झांकी के साथ श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी। भक्त मां के दर्शन कर स्वयं को धन्य मान रहे हैं।
मंदिर के पुजारी दिनेश कुमार ने बताया कि पौराणिक मान्यता के अनुसार त्रेता युग में चंड-मुंड नामक दैत्यों के अत्याचार से त्रस्त देवताओं की पुकार पर काली माता प्रकट हुईं। दैत्यों के संहार के दौरान उनके क्रोध से माता का मुख कंकाल स्वरूप में परिवर्तित हुआ और तभी से मां कंकाल काली के रूप में पूजी जाती हैं।
ग्रामीणों के अनुसार करीब एक सदी पहले एक किसान को खेत जोतते समय हल से टकराकर यह दिव्य प्रतिमा मिली। सूचना फैलते ही ग्रामीणों की भीड़ जुटी और विधि-विधान से प्राण प्रतिष्ठा की गई। वर्ष 1996 में स्व. कुल्लन सिंह की स्मृति में मंदिर का निर्माण कराया गया।
नवरात्र में दूर-दराज से आए श्रद्धालु मां के चरणों में शीश नवाकर अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति की कामना कर रहे हैं। मंदिर परिसर में दिनभर जयकारों और भक्ति के गीतों की गूंज सुनाई दे रही है, जिससे माहौल अत्यंत पावन और भक्तिमय बना हुआ है।












