प्रयागराज, 27 मार्च 2026।
उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रयागराज को धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है। महाकुंभ के पूर्व और उसके बाद बनाए गए मंदिरों के कॉरिडोर ने शहर को अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर स्थापित किया है।
जिलाधिकारी मनीष कुमार वर्मा ने बताया कि प्रयागराज की धार्मिक और आध्यात्मिक पहचान को सुदृढ़ करने के लिए पांच प्रमुख आध्यात्मिक कॉरिडोर और आठ मंदिरों के कॉरिडोर बनाए गए हैं। संगम के पास हनुमान मंदिर कॉरिडोर, अक्षयवट मंदिर सरस्वती कूप कॉरिडोर और भारद्वाज आश्रम कॉरिडोर इनमें प्रमुख हैं।
शहर के द्वादश माधव मंदिरों में 12.34 करोड़ रुपये की लागत से बुनियादी संरचना का विकास और सौंदर्यीकरण किया गया। इसके अलावा 11 प्राचीन मंदिरों में 19.01 करोड़ की लागत से कायाकल्प किया गया, जिससे पर्यटकों को बेहतर अनुभव और सुविधाएं उपलब्ध हुई हैं।
प्रयागराज के प्रमुख मंदिरों में फतेहपुर घाट का भद्रेश्वर महादेव, भोलेगिरी मंदिर, करछना का फलाहारी बाबा मंदिर, जमुनीपुर का ऐंद्री धाम, पंचदेवरा का दुर्गा मंदिर धाम, देवली का श्री बजरंग आश्रम धाम, हंडिया बरोत का भैल नाथ मंदिर, मऊ आइमा का शिवाला मंदिर, कोरांव का शंकर मंदिर और बोलन महादेव मंदिर शामिल हैं। इन मंदिरों के लिए 1367.87 लाख की प्रशासकीय स्वीकृति मिल चुकी है और 564 लाख का बजट जारी किया जा चुका है।
धार्मिक उत्सवों और मेलों ने पर्यटन को गति दी है। महाकुंभ-2025, कुंभ और माघ मेले जैसे आयोजन प्रयागराज में पर्यटक आगमन बढ़ाने में सहायक रहे। पर्यटन विभाग द्वारा यमुना नदी में 21 करोड़ की लागत से वाटर लेजर शो और छह पर्यटन स्थलों में 25 करोड़ की फसाड लाइट की व्यवस्था पर्यटकों को आकर्षित कर रही है। 2017 की तुलना में पर्यटक पहुंच 2 फीसदी से बढ़कर 10 फीसदी हो गई है। महाकुंभ-2025 में 66.30 करोड़ श्रद्धालुओं ने आगमन कर शहर को नई पहचान दी जबकि माघ मेला-2026 में 22 करोड़ से अधिक का फुटफॉल रिकॉर्ड बन गया।












